T20 वर्ल्ड कप के सितारे संजू सैमसन को बेहद पसंद है केरल की फिश-कप्पा, जानें इसे बनाने का देसी तरीका

फिश-कप्पा: केरल की पारंपरिक डिश
भारत के क्रिकेट सितारे संजू सैमसन ने हाल ही में एक इंटरव्यू में अपने पसंदीदा भोजन का जिक्र किया, जिसमें केरल की मशहूर फिश-कप्पा सबसे ऊपर है। यह डिश केवल स्वादिष्ट नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक समृद्ध सांस्कृतिक विरासत भी है। फिश-कप्पा, जिसे आमतौर पर नाश्ते या मुख्य भोजन के रूप में परोसा जाता है, केरल की खासियत है।
संजीवनी के रूप में फिश-कप्पा
संकेत मिलता है कि संजू सैमसन का केरल से गहरा संबंध है, और उनकी पसंदीदा डिश फिश-कप्पा उनकी मातृभूमि के प्रति उनकी मोहब्बत को दर्शाती है। फिश-कप्पा मछली और कच्चे केले का एक अनोखा मिश्रण है, जो नारियल के दूध के साथ पकाया जाता है। यह डिश न केवल पौष्टिक होती है, बल्कि इसके स्वाद में भी बेजोड़ होती है।
फिश-कप्पा बनाने की विधि
फिश-कप्पा बनाने के लिए निम्नलिखित सामग्री की आवश्यकता होती है:
- मछली (आप अपनी पसंद की मछली का उपयोग कर सकते हैं)
- कच्चे केले
- नारियल का दूध
- प्याज, अदरक, लहसुन
- मसाले (धनिया, मिर्च, हल्दी)
इस डिश को बनाने के लिए सबसे पहले कच्चे केले को उबालें और मछली को मसालों के साथ मैरिनेट करें। फिर एक कढ़ाई में प्याज, अदरक और लहसुन को भूनें। इसके बाद, मछली और नारियल का दूध डालकर एक साथ पकाएं। अंत में, उबले हुए केले को मछली के साथ मिला दें।
संजीवनी का महत्व
फिश-कप्पा केवल एक डिश नहीं है, बल्कि यह केरल की संस्कृति और परंपरा का एक हिस्सा है। यह डिश न केवल स्थानीय लोगों के लिए, बल्कि पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र है। इसके साथ ही, केरल की इस डिश ने संजू सैमसन जैसे खिलाड़ियों को अपने घर की याद दिलाई है।
आम जनता पर प्रभाव
संजू सैमसन के इस खुलासे से न केवल क्रिकेट फैंस को खुशी मिली है, बल्कि इससे केरल की फिश-कप्पा की लोकप्रियता भी बढ़ी है। लोग अब इस डिश को अपने घर पर बनाना चाहेंगे और इसे अपने मेहमानों को पेश करेंगे। इससे न केवल केरल की संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि स्थानीय व्यवसायों को भी फायदा होगा।
आगे की संभावनाएं
फिश-कप्पा की बढ़ती लोकप्रियता के साथ, हम उम्मीद कर सकते हैं कि यह डिश आने वाले समय में और भी अधिक लोगों के बीच प्रसिद्ध होगी। संजू सैमसन जैसे सितारे जब अपने पसंदीदा भोजन के बारे में बात करते हैं, तो यह उनके फैंस को प्रेरित करता है। इससे न केवल फिश-कप्पा का व्यंजन लोकप्रिय होगा, बल्कि यह केरल की अन्य पारंपरिक डिशेज़ को भी प्रोत्साहित करेगा।



