National

सुप्रीम कोर्ट ने पितृत्व अवकाश पर कानून बनाने की केंद्र को दी सलाह, कहा- पालन-पोषण सिर्फ मां की जिम्मेदारी नहीं

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में पितृत्व अवकाश की आवश्यकता पर जोर देते हुए केंद्र सरकार को सलाह दी है कि इस दिशा में ठोस कानून बनाना आवश्यक है। न्यायालय ने कहा कि बच्चों के पालन-पोषण की जिम्मेदारी केवल मां पर नहीं होनी चाहिए, बल्कि पिता को भी इसमें सक्रिय भागीदारी निभानी चाहिए।

क्या है मामला?

यह मामला तब सामने आया जब एक याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसमें पितृत्व अवकाश की मांग की गई थी। याचिका में कहा गया था कि पिता को अपने बच्चे के जन्म के समय और उसके बाद की देखभाल के लिए अवकाश मिलना चाहिए, ताकि वह परिवार की जिम्मेदारियों को संभाल सके।

कब और कहां हुआ यह फैसला?

सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला हाल ही में सुनाया, जब देश में पितृत्व अवकाश की मांग को लेकर चर्चा तेज हो गई थी। यह सुनवाई उच्चतम न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश और एक अन्य न्यायाधीश की पीठ द्वारा की गई।

क्यों जरूरी है पितृत्व अवकाश?

आज के समय में, जब महिलाओं को कार्यक्षेत्र में आगे बढ़ने का अवसर मिल रहा है, वहीं पुरुषों को भी अपने पारिवारिक दायित्वों को निभाने की जरूरत है। पितृत्व अवकाश से न केवल पिता और बच्चे के बीच का बंधन मजबूत होगा, बल्कि यह परिवार के लिए भी सकारात्मक प्रभाव डालेगा।

किसने दिया यह सुझाव?

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को यह सुझाव दिया कि पितृत्व अवकाश पर कानून बनाना आवश्यक है। न्यायालय ने कहा कि यह सिर्फ एक सुझाव नहीं, बल्कि एक आवश्यकता है, ताकि समाज में समानता की भावना को बढ़ावा मिल सके।

इसका आम लोगों पर असर

यदि केंद्र सरकार इस सलाह पर अमल करती है और पितृत्व अवकाश का कानून बनाती है, तो इसका व्यापक असर पड़ेगा। इससे न केवल कार्यस्थलों पर पिता और माता के बीच की जिम्मेदारियों में समानता आएगी, बल्कि यह कार्य-जीवन संतुलन को भी बेहतर बनाएगा।

विशेषज्ञों की राय

इस मुद्दे पर बात करते हुए समाजशास्त्री डॉ. अनुराग शर्मा ने कहा, “पितृत्व अवकाश की जरूरत सिर्फ एक अधिकार नहीं है, बल्कि यह परिवारिक संरचना को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह बच्चों के विकास के लिए भी आवश्यक है।”

आगे क्या हो सकता है?

अब देखना यह है कि केंद्र सरकार इस सुझाव पर कितनी गंभीरता से विचार करती है और कब तक इस दिशा में ठोस कदम उठाती है। यदि यह कानून लागू होता है, तो यह न सिर्फ भारत में, बल्कि विश्व स्तर पर एक मिसाल कायम कर सकता है।

WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now
Instagram Group Join Now

Priya Sharma

प्रिया शर्मा एक अनुभवी राष्ट्रीय मामलों की संवाददाता हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर करने के बाद वे पिछले 8 वर्षों से राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग कर रही हैं।

Related Articles

Back to top button