FPI ने मार्च में ₹88180 करोड़ की शेयरों की बिक्री जारी रखी; जानें इसके पीछे की वजहें

क्या हो रहा है?
मार्च 2023 में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने भारतीय शेयर बाजार से ₹88180 करोड़ की बिकवाली की है। यह आंकड़ा इस महीने की शुरुआत से अब तक का है, जो दर्शाता है कि विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से तेजी से बाहर निकल रहे हैं। ऐसे समय में जब भारतीय अर्थव्यवस्था में विकास की उम्मीदें हैं, यह बिकवाली कई सवाल खड़े कर रही है।
कब और कहां?
यह बिकवाली मार्च 2023 के पहले हफ्ते से शुरू हुई और अब तक जारी है। इस दौरान, विशेष रूप से बीएसई और एनएसई पर शेयरों की कीमतों में गिरावट देखी गई है। मार्च महीने में, FPI का यह कदम भारतीय शेयर बाजार के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।
क्यों हो रही है बिकवाली?
FPI की इस बिकवाली के पीछे कई कारण हैं। सबसे प्रमुख कारण वैश्विक आर्थिक स्थिति में अस्थिरता है। अमेरिका और यूरोप में बढ़ती ब्याज दरें और संभावित आर्थिक मंदी की आशंका ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है। इसके अलावा, भारत में महंगाई दर में वृद्धि और रुपये की गिरती वैल्यू भी एक महत्वपूर्ण कारक है।
कैसे हुआ ये असर?
इस बिकवाली का असर सीधे तौर पर भारतीय शेयर बाजार पर पड़ा है। बाजार में गिरावट ने निवेशकों के विश्वास को कमजोर किया है, जिसके परिणामस्वरूप कई छोटे निवेशक भी अपने निवेश को वापस लेने पर मजबूर हुए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह प्रवृत्ति जारी रहती है, तो भारतीय बाजार में और अधिक गिरावट आ सकती है।
किसने कहा क्या?
वित्तीय विश्लेषक और मार्केट एक्सपर्ट, राजीव कुमार ने कहा, “इस तरह की बिकवाली को देखना चिंताजनक है। यह दर्शाता है कि विदेशी निवेशक हमारे बाजार के प्रति आशंकित हैं। यदि हम अपने आर्थिक विकास की गति को बनाए रखना चाहते हैं, तो हमें घरेलू निवेशकों का विश्वास जीतना होगा।”
आगे क्या हो सकता है?
आने वाले दिनों में यदि वैश्विक आर्थिक स्थिति में सुधार नहीं होता है, तो FPI की बिकवाली जारी रह सकती है। इसके परिणामस्वरूप भारतीय शेयर बाजार में और गिरावट देखने को मिल सकती है। लेकिन यदि सरकार उचित कदम उठाती है और घरेलू निवेशकों के लिए प्रोत्साहन प्रदान करती है, तो स्थिति में सुधार की संभावना है।



