दिल्ली AIIMS में हरीश राणा का निधन, 13 साल कोमा में रहने के बाद मिली इच्छा मृत्यु; देश का पहला मामला

दिल्ली AIIMS में हरीश राणा का निधन
दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में हरीश राणा का निधन हो गया। 13 वर्षों तक कोमा में रहने के बाद उन्हें इच्छा मृत्यु प्रदान की गई। यह मामला देश में अपने आप में एक अनूठा और ऐतिहासिक मामला बन गया है, जिसने चिकित्सा क्षेत्र में कई चर्चाएँ शुरू कर दी हैं।
क्या हुआ और क्यों?
हरीश राणा, जो 2009 में एक गंभीर सड़क दुर्घटना का शिकार हुए थे, तब से कोमा में थे। उनके परिवार ने उनके जीने की इच्छा के बारे में अनेक बार बात की, लेकिन जब उनकी स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तब उन्होंने इच्छा मृत्यु का विकल्प चुना।
कोमा में रहने का लंबा समय
13 साल तक कोमा में रहने के दौरान, हरीश राणा का परिवार उन्हें हर संभव तरीके से जीवन में वापस लाने की कोशिश करता रहा। लेकिन चिकित्सा विज्ञान की सीमाएँ और हरीश की स्थिति ने उन्हें असहाय बना दिया। इस बीच, चिकित्सकों ने भी उनकी स्थिति पर ध्यान दिया और यह निर्णय लिया गया कि अब उन्हें इच्छा मृत्यु दी जानी चाहिए।
इस मामले का प्रभाव
हरीश राणा का यह मामला न केवल उनके परिवार के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए एक महत्वपूर्ण चर्चा का विषय बन गया है। इच्छा मृत्यु पर कानून और इसके सामाजिक-आर्थिक प्रभावों पर बहस शुरू हो गई है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला अन्य परिवारों के लिए भी एक मिसाल बन सकता है, जो अपने प्रियजनों की गंभीर स्थिति का सामना कर रहे हैं।
विशेषज्ञों की राय
दिल्ली के एक प्रमुख न्यूरोलॉजिस्ट, डॉ. राधिका मेहरा ने इस मामले पर कहा, “यह एक संवेदनशील मुद्दा है। इच्छा मृत्यु का निर्णय लेना बहुत कठिन होता है, लेकिन कभी-कभी यह जीवन की गुणवत्ता को बनाए रखने का एक तरीका हो सकता है।”
आगे का रास्ता
आने वाले समय में, इस मामले के चलते इच्छा मृत्यु के कानूनों पर फिर से विचार किया जा सकता है। यह संभव है कि सरकार इस मुद्दे पर एक व्यापक चर्चा का आयोजन करे, जिससे ऐसे मामलों में लोगों की भावनाओं और जरूरतों को समझा जा सके। हरीश राणा का मामला निश्चित रूप से एक बदलाव लाने वाला हो सकता है, जिससे समाज में इस विषय पर खुली बातचीत हो सके।



