क्या बच्चों की फौज खामेनेई की मौत का बदला लेगी? ईरान की सेना में 12 साल के मासूमों की भर्ती शुरू

ईरान में बच्चों की भर्ती का नया अध्याय
ईरान की सेना ने हाल ही में एक विवादास्पद कदम उठाते हुए 12 साल के बच्चों की भर्ती शुरू कर दी है। इस कदम का उद्देश्य ईरान की सैन्य ताकत को बढ़ाना और खामेनेई की मौत के बाद संभावित सैन्य कार्रवाइयों के लिए युवा सैनिक तैयार करना बताया जा रहा है।
कब और कहां शुरू हुई भर्ती?
यह भर्ती प्रक्रिया पिछले हफ्ते ईरान के विभिन्न शहरों में शुरू हुई। सरकारी मीडिया के अनुसार, यह भर्ती उन बच्चों के लिए है जो ईरानी क्रांति के प्रति अपनी निष्ठा और बलिदान की भावना को दर्शाना चाहते हैं।
क्यों की जा रही है यह भर्ती?
ईरान में इस भर्ती का मुख्य उद्देश्य खामेनेई की मौत के बाद उत्पन्न हुई राजनीतिक और सैन्य अस्थिरता का मुकाबला करना है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस समय ईरान की सुरक्षा स्थिति संवेदनशील है, और ऐसे में युवा सैनिकों की भर्ती से सेना की संख्या और ताकत दोनों में वृद्धि होगी।
कैसे की जा रही है भर्ती?
भर्ती प्रक्रिया को ईरान के शिक्षा मंत्रालय और सैन्य अधिकारियों द्वारा संचालित किया जा रहा है। बच्चों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिसमें उन्हें सैन्य तकनीक और रणनीतियों का ज्ञान दिया जाएगा। इसके साथ ही, बच्चों को सैन्य परेड और अन्य कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।
इस कदम का प्रभाव
इस भर्ती का आम लोगों और देश पर क्या असर होगा, यह एक बड़ा सवाल है। कई नागरिकों ने इस कदम की आलोचना की है, यह कहते हुए कि बच्चों का युद्ध में इस्तेमाल करना अमानवीय है। सामाजिक संगठनों ने भी इस भर्ती का विरोध किया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रकार की भर्ती से ईरान में सामाजिक तनाव बढ़ सकता है। बच्चों के जीवन पर इसका दीर्घकालिक प्रभाव पड़ सकता है, जो उनकी शिक्षा और मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करेगा।
विशेषज्ञों की राय
एक मानवाधिकार कार्यकर्ता ने कहा, “बच्चों को युद्ध में झोंकना एक गंभीर अपराध है। यह केवल ईरान ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय है। हमें इसके खिलाफ आवाज उठानी चाहिए।”
आगे का परिदृश्य
ईरान की सेना में बच्चों की भर्ती के इस कदम के साथ ही राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाओं का एक नया दौर शुरू होने की संभावना है। यदि यह प्रक्रिया जारी रहती है, तो आने वाले दिनों में ईरान में और अधिक विरोध प्रदर्शन और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना देखने को मिल सकती है।



