जनगणना 2026: अब ‘लिव-इन’ कपल्स भी होंगे शादीशुदा, सरकार ने जारी किए 33 सवालों के जवाब

परिचय
भारत की जनगणना 2026 में नए नियमों के अनुसार, अब ‘लिव-इन’ कपल्स को भी शादीशुदा माना जाएगा। यह निर्णय हाल ही में सरकार द्वारा जारी किए गए 33 सवालों के उत्तरों में शामिल किया गया है। इस बदलाव का उद्देश्य समाज के बदलते स्वरूप को ध्यान में रखते हुए जनगणना को अधिक समावेशी बनाना है।
क्या है यह नया नियम?
सरकार ने इस बार की जनगणना में लिव-इन संबंधों को मान्यता देने का निर्णय लिया है। इससे पहले, ऐसे संबंधों को औपचारिक रूप से वैध नहीं माना जाता था और जनगणना में इन्हें शामिल नहीं किया जाता था। अब लिव-इन कपल्स को भी शादीशुदा के रूप में वर्गीकृत किया जाएगा, जिससे उनकी संख्या और सामाजिक स्थिति का सही आंकड़ा प्राप्त किया जा सकेगा।
कब और कहां लागू होगा?
यह नया नियम 2026 की जनगणना के दौरान लागू होगा, जो देशभर में आयोजित की जाएगी। जनगणना का कार्य आमतौर पर हर दस साल में होता है, और इस बार भी इसे व्यापक स्तर पर किया जाएगा, जिसमें सभी नागरिकों की जानकारी इकट्ठा की जाएगी।
इस बदलाव का कारण
समाज में लिव-इन संबंधों की बढ़ती स्वीकार्यता के कारण सरकार ने इसे जनगणना में शामिल करने का निर्णय लिया है। पिछले कुछ दशकों में, भारत में पारंपरिक विवाह के अलावा अन्य संबंधों की भी मान्यता बढ़ी है। यह कदम युवा पीढ़ी की सोच और जीवनशैली को दर्शाता है।
इसका आम लोगों पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
इस निर्णय का व्यापक प्रभाव पड़ेगा। सबसे पहले, इससे जनगणना के आंकड़े अधिक सटीक होंगे, जो नीति निर्माण में सहायक साबित होंगे। इसके अलावा, इससे लिव-इन कपल्स को सामाजिक मान्यता मिलेगी, जिससे वे अपने अधिकारों के लिए भी आवाज़ उठा सकेंगे।
विशेषज्ञों की राय
विभिन्न सामाजिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भारत में लिव-इन संबंधों को एक नई पहचान देगा। समाजशास्त्री डॉ. सुमन शर्मा का कहना है, “यह बदलाव न केवल सांख्यिकीय दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह समाज में लिव-इन संबंधों की स्वीकार्यता को भी दर्शाता है।”
आगे का रास्ता
आने वाले समय में, यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या इस निर्णय के बाद लिव-इन कपल्स को और अधिक अधिकार मिलते हैं और क्या सरकार इस दिशा में कोई नई नीतियाँ बनाती है। जनगणना 2026 में इस बदलाव का प्रभाव स्पष्ट रूप से देखने को मिलेगा।



