क्या ईरान की सत्ता पर IRGC ने कर लिया है कब्जा? राष्ट्रपति पेजेशकियान हैं अलग-थलग

बैकग्राउंड
ईरान में सत्ता संघर्ष का एक नया अध्याय सामने आया है, जहाँ इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने राष्ट्रपति पेजेशकियान की सत्ता को चुनौती दी है। पिछले कुछ महीनों में, ईरान की राजनीतिक स्थिति में बदलाव आए हैं, जिससे यह अनुमान लगाया जा रहा है कि IRGC ने सत्ता पर अधिक नियंत्रण स्थापित कर लिया है।
क्या हो रहा है?
हाल ही में हुई घटनाओं के अनुसार, IRGC ने कई महत्वपूर्ण पदों पर अपने लोगों की नियुक्ति की है, जिससे राष्ट्रपति पेजेशकियान की स्थिति कमजोर होती नजर आ रही है। यह घटनाक्रम तब हुआ जब पेजेशकियान ने IRGC के खिलाफ कुछ नीतिगत निर्णय लिए थे, जिससे उनकी स्थिति और भी कमजोर हो गई।
कब और कहां?
यह राजनीतिक उथल-पुथल पिछले महीने से तेज़ हुई है, जब पेजेशकियान ने IRGC के कुछ सदस्यों को बर्खास्त करने का निर्णय लिया। यह घटना तेहरान में घटित हुई, जहाँ IRGC ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए राष्ट्रपति के खिलाफ एक अभियान शुरू किया।
क्यों और कैसे?
IRGC का यह कदम देश की आंतरिक सुरक्षा और राजनीतिक स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है। ईरान में कई बार यह देखा गया है कि IRGC ने सरकारों को अस्थिर करने के लिए सक्रिय भूमिका निभाई है। पेजेशकियान का विरोध करने का मुख्य कारण उनके द्वारा उठाए गए आर्थिक सुधार के कदम हैं, जो IRGC के हितों के खिलाफ हैं।
किसने क्या कहा?
विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटनाक्रम ईरान की राजनीति में एक नई दिशा का संकेत है। राजनीतिक विश्लेषक डॉ. फरीद ने कहा, “यदि IRGC ने पूरी तरह से सत्ता संभाल ली, तो यह ईरान में लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को पीछे धकेल देगा।”
आम लोगों पर प्रभाव
इस घटनाक्रम का आम ईरानी नागरिकों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। आर्थिक सुधारों की बाधा के कारण, महंगाई और बेरोजगारी की समस्या और बढ़ सकती है। नागरिक अधिकारों में कटौती की संभावनाएं भी बढ़ गई हैं।
आगे क्या हो सकता है?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि पेजेशकियान अपनी स्थिति को मजबूती नहीं दे पाते, तो IRGC पूरी तरह से सत्ता पर काबिज हो सकता है। आने वाले दिनों में, ईरान में राजनीतिक मंथन जारी रह सकता है, और यह देखना होगा कि क्या राष्ट्रपति अपनी स्थिति को फिर से हासिल कर पाते हैं या नहीं।



