Latest News

होर्मुज पर यूएन में चीन-रूस-फ्रांस की तिकड़ी का बड़ा यूटर्न, अमेरिका का दोस्त बना मुंह ताकता

क्या हुआ?

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में हाल ही में होर्मुज जलडमरूमध्य के मुद्दे पर एक महत्वपूर्ण मोड़ आया है। चीन, रूस और फ्रांस की तिकड़ी ने अमेरिका की प्रस्तावित योजना को नकारते हुए एक नई रणनीति का समर्थन किया है। यह घटनाक्रम अमेरिका के लिए एक बड़ा झटका है, क्योंकि वह इस क्षेत्र में अपने प्रभाव को बढ़ाने की कोशिश कर रहा था।

कब और कहां?

यह घटना 15 अक्टूबर 2023 को हुई, जब यूएन की सुरक्षा परिषद ने होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ती तनाव की स्थिति पर चर्चा की। यह जलडमरूमध्य, जो कि ईरान और ओमान के बीच स्थित है, विश्व के लिए एक महत्वपूर्ण नाविक मार्ग है, जहां से रोजाना लाखों बैरल तेल का परिवहन होता है।

क्यों हुआ यह बदलाव?

अमेरिका ने इस क्षेत्र में अपने सैन्य उपस्थिति को बढ़ाने और ईरान के खिलाफ कठोर नीतियों को लागू करने का प्रस्ताव रखा था। लेकिन चीन, रूस और फ्रांस ने इस प्रस्ताव का विरोध करते हुए एक बहुपरकारी दृष्टिकोण को अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उनका मानना है कि तनाव को बढ़ाने से स्थिति और भी बिगड़ सकती है, और एक शांतिपूर्ण समाधान की आवश्यकता है।

कैसे हुआ यह सब?

इस तिकड़ी ने एक संयुक्त बयान जारी किया जिसमें कहा गया कि सभी पक्षों को बातचीत के माध्यम से मतभेदों को सुलझाना चाहिए। इस पर अमेरिका ने कड़ी प्रतिक्रिया दी, यह कहते हुए कि यह कदम वैश्विक सुरक्षा के लिए खतरा हो सकता है।

किसने क्या कहा?

चीन के विदेश मंत्री ने कहा, “हमारा लक्ष्य क्षेत्रीय स्थिरता है और हम सभी देशों से अपील करते हैं कि वे आक्रामकता की नीति को छोड़कर सहयोग की दिशा में बढ़ें।” वहीं, रूस के प्रतिनिधि ने यह भी कहा कि सुरक्षा परिषद को एकजुट रहकर किसी भी प्रकार के सैन्य हस्तक्षेप से बचना चाहिए।

इसका आम लोगों पर क्या असर होगा?

इस घटनाक्रम का असर वैश्विक तेल बाजार पर पड़ सकता है। होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले तेल की कीमतों में वृद्धि हो सकती है, जिससे आम लोगों को भी महंगाई का सामना करना पड़ सकता है। इसके अतिरिक्त, यह स्थिति अंतरराष्ट्रीय संबंधों में भी तनाव पैदा कर सकती है, जो कि अंततः वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकती है।

आगे क्या हो सकता है?

विशेषज्ञों के अनुसार, यदि अमेरिका और उसके सहयोगी इस स्थिति को संभालने में असफल रहते हैं, तो यह क्षेत्र में और अधिक संघर्ष को जन्म दे सकता है। वहीं, यदि चीन, रूस और फ्रांस अपने प्रस्तावों पर दृढ़ रहते हैं, तो यह एक नई वैश्विक राजनीतिक व्यवस्था का संकेत हो सकता है।

WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now
Instagram Group Join Now

Rajesh Kumar

राजेश कुमार दैनिक टाइम्स के सीनियर रिपोर्टर हैं। 10 वर्षों के अनुभव के साथ वे ब्रेकिंग न्यूज और ताज़ा खबरों पर त्वरित और सटीक रिपोर्टिंग करते हैं। अपराध, दुर्घटना और प्रशासनिक मामलों पर उनकी विशेष पकड़ है।

Related Articles

Back to top button