अक्षय तृतीया 2026: पूजा-खरीदारी का शुभ मुहूर्त, विधि, मंत्र और कथा जानें

अक्षय तृतीया का महत्व
अक्षय तृतीया हर साल वैशाख मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है। यह दिन विशेष रूप से शुभ माना जाता है और इसे धन, समृद्धि और खुशियों का प्रतीक माना जाता है। इस दिन किए गए कार्यों का फल हमेशा के लिए अक्षय होता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु ने औदुम्बर वृक्ष के नीचे अवतार लिया था, इसलिए इसे भगवान विष्णु का दिन भी कहा जाता है।
पूजा का शुभ मुहूर्त
अक्षय तृतीया के दिन पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 6:00 बजे से लेकर दोपहर 12:00 बजे तक है। इस समय के बीच श्रद्धालु भगवान विष्णु की पूजा कर सकते हैं। इसके अलावा, इस दिन सोने-चांदी की खरीदारी भी विशेष रूप से लाभदायक मानी जाती है।
पूजा विधि और मंत्र
अक्षय तृतीया पर पूजा विधि में सबसे पहले स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें। फिर, घर के पूजाघर में भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। इसके बाद, निम्नलिखित मंत्र का जाप करें:
- ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
पूजा के अंत में भगवान को मिठाई, फल और फूल अर्पित करें।
कथा का महत्व
अक्षय तृतीया की एक प्रसिद्ध कथा है जो इस दिन के महत्व को दर्शाती है। पुराणों के अनुसार, इस दिन राजा राधिका ने भगवान कृष्ण से धन की प्राप्ति के लिए पूजा की थी, जिससे उन्हें अपार धन और समृद्धि मिली। यह कथा हमें यह सिखाती है कि श्रद्धा और भक्ति से सभी इच्छाएं पूर्ण होती हैं।
इस दिन का सामाजिक प्रभाव
अक्षय तृतीया का पर्व केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। इस दिन सोने और चांदी की खरीदारी बढ़ जाती है, जिससे बाजार में रौनक आती है। व्यापारियों के लिए यह दिन लाभदायक होता है और आम लोगों को भी इस दिन नई चीजें खरीदने का अवसर मिलता है।
विशेषज्ञों की राय
विभिन्न धार्मिक विशेषज्ञों का मानना है कि अक्षय तृतीया का पर्व हमें सकारात्मकता और नई शुरुआत का संदेश देता है। प्रसिद्ध ज्योतिषी डॉ. आनंद ने कहा, “इस दिन किए गए शुभ कार्य और निवेश हमेशा फलदायी होते हैं।”
आगे क्या हो सकता है?
जैसे-जैसे अक्षय तृतीया नजदीक आ रहा है, विभिन्न धर्म स्थलों पर श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ने की संभावना है। यह पर्व न केवल धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि सामाजिक और आर्थिक दृष्टि से भी हमारे समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की क्षमता रखता है। इस पर्व के दौरान होने वाली खरीदारी और धार्मिक अनुष्ठान लोगों को एकजुट करने का कार्य करेंगे।


