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’23 साल कमेंट्री की, रंग की वजह से टॉस के समय नहीं भेजा’, इस कमेंटेटर ने अब छोड़ा ये काम

कमेंटेटर का अचानक फैसला

क्रिकेट के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाने वाले कमेंटेटर ने हाल ही में यह घोषणा की कि वे अब कमेंट्री का कार्य छोड़ रहे हैं। 23 सालों से इस क्षेत्र में काम कर रहे इस कमेंटेटर ने अपने इस्तीफे के पीछे एक गंभीर कारण बताया है।

क्या हुआ था टॉस के समय?

हाल ही में हुए एक महत्वपूर्ण मैच के दौरान, इस कमेंटेटर को टॉस के समय संज्ञान में आया कि उन्हें उनकी त्वचा के रंग के कारण स्टेडियम में नहीं भेजा गया। यह घटना न केवल उनके लिए बल्कि पूरे क्रिकेट समुदाय के लिए एक बड़ा झटका थी। उन्होंने कहा कि यह एक ऐसा अनुभव था जिसे वह कभी नहीं भूल सकते।

किसने किया खुलासा?

इस कमेंटेटर ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर इस घटना का खुलासा किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह निर्णय उनके लिए आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने महसूस किया कि यह उनके लिए सबसे सही कदम है। उन्होंने कहा, “जब मैंने यह देखा कि मुझे सिर्फ रंग के कारण टॉस में नहीं बुलाया गया, तो यह मेरे लिए बहुत निराशाजनक था।”

पृष्ठभूमि और प्रभाव

यह पहली बार नहीं है जब रंगभेद के मुद्दे पर चर्चा हुई है। खेल के क्षेत्र में रंगभेद का यह मुद्दा कई बार सुर्खियों में आया है। विशेष रूप से क्रिकेट में, जहां खिलाड़ी और कमेंटेटर दोनों ही विभिन्न पृष्ठभूमियों से आते हैं। इस घटना ने एक बार फिर से रंगभेद के खिलाफ आवाज उठाने की आवश्यकता को उजागर किया है।

विशेषज्ञों की राय

इस मुद्दे पर बात करते हुए, खेल विश्लेषक ने कहा, “यह घटना हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या हम सच में एक समावेशी समाज बना पा रहे हैं। कमेंटेटर के अनुभव ने हमें यह दिखाया है कि रंगभेद अभी भी हमारे बीच एक वास्तविकता है।”

आगे की संभावनाएं

अब जब इस कमेंटेटर ने कमेंट्री छोड़ दी है, तो यह देखना होगा कि क्या अन्य कमेंटेटर इस घटना से प्रेरित होकर कुछ कदम उठाएंगे। क्या खेल के क्षेत्र में समावेशिता की दिशा में कुछ ठोस कदम उठाए जाएंगे? यह सवाल अभी भी अनुत्तरित है।

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Kavita Rajput

कविता राजपूत खेल जगत की प्रतिष्ठित संवाददाता हैं। क्रिकेट, फुटबॉल, बैडमिंटन और ओलंपिक खेलों पर उनकी रिपोर्टिंग को पाठक बहुत पसंद करते हैं। वे पिछले 6 वर्षों से खेल पत्रकारिता से जुड़ी हैं।

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