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981 से 2.39 लाख यूनिट्स तक, इलेक्ट्रिक वाहनों का सफर

इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती संख्या

भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) का सफर पिछले एक दशक में अत्यधिक परिवर्तनशील रहा है। 2010 में सिर्फ 981 यूनिट्स की बिक्री से शुरू होकर, 2023 में यह आंकड़ा 2.39 लाख यूनिट्स तक पहुंच चुका है। यह न केवल देश की परिवहन प्रणाली में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत है, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण के प्रति देश की प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है।

कब और कहां हुआ यह बदलाव?

2010 में भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री लगभग नगण्य थी, लेकिन 2019 के बाद से सरकारी नीतियों और सब्सिडी के चलते इस क्षेत्र में तेजी आई। सरकार ने FAME (फास्ट एडॉप्शन एंड मैन्युफैक्चरिंग ऑफ इलेक्ट्रिक व्हीकल्स) योजना के तहत प्रोत्साहन प्रदान किए, जिससे अधिक लोग EV खरीदने के लिए प्रेरित हुए।

क्यों बढ़ी EVs की मांग?

इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग बढ़ने के कई कारण हैं। सबसे पहले, पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतें लोगों को वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की ओर आकर्षित कर रही हैं। इसके अलावा, बढ़ती प्रदूषण की समस्या ने भी EVs की आवश्यकता को और अधिक महत्वपूर्ण बना दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार की नीतियों और उपभोक्ताओं की बदलती प्राथमिकताओं ने इस क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव किया है।

कैसे बदल रही है तस्वीर?

इलेक्ट्रिक वाहन निर्माता कंपनियों ने न केवल नए मॉडल लॉन्च किए हैं, बल्कि वे बैटरी तकनीक में भी सुधार कर रही हैं। इससे वाहनों की रेंज और चार्जिंग समय में कमी आई है। उदाहरण के लिए, टेस्ला, महिंद्रा, और टाटा जैसी कंपनियों ने अपने EVs की रेंज को बढ़ाकर उपभोक्ताओं के लिए इसे और भी आकर्षक बना दिया है।

इसका आम लोगों पर क्या असर होगा?

EVs के बढ़ते उपयोग से न केवल प्रदूषण में कमी आएगी, बल्कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा भी मजबूत होगी। इलेक्ट्रिक वाहनों के बढ़ते उपयोग से पेट्रोलियम उत्पादों पर निर्भरता कम होगी, जिससे विदेशी आयात पर निर्भरता घटेगी। इसके अलावा, स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों का उपयोग बढ़ने से पर्यावरण की स्थिति में सुधार होगा।

विशेषज्ञों की राय

एक्सपर्ट्स का मानना है कि यदि सरकार EVs के लिए और अधिक प्रोत्साहन देती है, तो यह आंकड़ा अगले 5 वर्षों में 5 लाख यूनिट्स तक पहुंच सकता है। इलेक्ट्रिक वाहनों के क्षेत्र में काम कर रहे एक विशेषज्ञ, डॉ. राधिका शर्मा का मानना है, “भारत में EVs का भविष्य बहुत उज्ज्वल है। अगर हम सही दिशा में काम करते रहें, तो हम न केवल अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा कर सकते हैं, बल्कि वैश्विक जलवायु लक्ष्यों को भी हासिल कर सकते हैं।”

आगे क्या हो सकता है?

आने वाले समय में, EVs की संख्या और अधिक तेजी से बढ़ सकती है। नई तकनीकों और सरकारी नीतियों के साथ, हमें उम्मीद है कि इलेक्ट्रिक वाहनों की बाजार हिस्सेदारी में वृद्धि होगी। इस क्षेत्र में निवेश भी बढ़ने की संभावना है, जिससे भारतीय बाजार में और अधिक प्रतिस्पर्धा देखने को मिलेगी।

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Sneha Verma

स्नेहा वर्मा बिजनेस और अर्थव्यवस्था की विशेषज्ञ पत्रकार हैं। IIM अहमदाबाद से MBA करने के बाद उन्होंने वित्तीय पत्रकारिता को अपना करियर बनाया। शेयर बाजार, स्टार्टअप और आर्थिक नीतियों पर उनकी गहरी पकड़ है।

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