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13 साल की लड़ाई: देश में पहली बार इच्छामृत्यु प्रक्रिया का आगाज़, एम्स में हरीश का लाइफ सपोर्ट धीरे-धीरे हटाया जाएगा

इच्छामृत्यु की प्रक्रिया का शुभारंभ

भारत में पहली बार इच्छामृत्यु की प्रक्रिया का आगाज़ हुआ है। यह प्रक्रिया एम्स (अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान) में शुरू की जा रही है, जहां 13 साल से कोमा में रहे हरीश का लाइफ सपोर्ट धीरे-धीरे हटाया जाएगा। यह एक ऐतिहासिक कदम है जो न केवल हरीश के परिवार के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया है।

क्या है इच्छामृत्यु?

इच्छामृत्यु का अर्थ है किसी व्यक्ति की इच्छा के अनुसार उसे मृत्यु की अनुमति देना। यह तब किया जाता है जब व्यक्ति एक गंभीर बीमारी से ग्रस्त हो और उसके जीवन की गुणवत्ता बहुत खराब हो चुकी हो। हरीश की स्थिति इस मामले को विशेष बनाती है, क्योंकि वह बीते 13 वर्षों से कोमा में हैं और उनके परिवार ने उनकी इच्छामृत्यु की मांग की थी।

कब और कैसे शुरू हुई प्रक्रिया?

यह प्रक्रिया 2023 के अक्टूबर महीने में शुरू हुई, जब एम्स ने हरीश के परिवार से संपर्क किया। डॉक्टरों ने परिवार को इस प्रक्रिया के सभी पहलुओं के बारे में जानकारी दी। हरीश की स्थिति को ध्यान में रखते हुए, चिकित्सकों ने निर्णय लिया कि लाइफ सपोर्ट को धीरे-धीरे हटाया जाएगा। यह प्रक्रिया कई स्वास्थ्य विशेषज्ञों की टीम द्वारा की जाएगी।

परिवार और समाज की प्रतिक्रिया

हरीश के परिवार ने इस निर्णय का स्वागत किया है। परिवार के एक सदस्य ने कहा, “हमने 13 साल की लंबी लड़ाई लड़ी है। अब हम चाहते हैं कि हरीश को शांति मिले।” वहीं, इस फैसले पर समाज में भी चर्चा हो रही है। कुछ लोग इस प्रक्रिया का समर्थन कर रहे हैं, जबकि कुछ इसे नैतिकता के खिलाफ मानते हैं।

इस प्रक्रिया का सामाजिक प्रभाव

इच्छामृत्यु की प्रक्रिया का भारत में होना एक नई बहस को जन्म देता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय न केवल हरीश के लिए, बल्कि समाज में अन्य लोगों के लिए भी एक उदाहरण बनेगा। यह उन परिवारों के लिए एक नई उम्मीद हो सकती है, जो अपने प्रियजनों की असहनीय पीड़ा को देख रहे हैं।

विशेषज्ञों की राय

डॉक्टरों का कहना है कि इच्छामृत्यु एक संवेदनशील मुद्दा है और इसे बहुत ध्यान से संभालना चाहिए। एक प्रसिद्ध चिकित्सक ने कहा, “इस प्रक्रिया को हर व्यक्ति की व्यक्तिगत इच्छाओं और स्वास्थ्य स्थितियों के अनुसार देखा जाना चाहिए।”

आगे का रास्ता

अब यह देखना होगा कि इस प्रक्रिया के बाद भारत में इच्छामृत्यु के कानूनों में क्या बदलाव आते हैं। क्या अन्य राज्यों में भी ऐसी प्रक्रियाएं शुरू की जाएंगी? यह एक महत्वपूर्ण सवाल है, जो आने वाले समय में हमारे समाज पर व्यापक प्रभाव डाल सकता है।

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Priya Sharma

प्रिया शर्मा एक अनुभवी राष्ट्रीय मामलों की संवाददाता हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर करने के बाद वे पिछले 8 वर्षों से राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग कर रही हैं।

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