अप्रैल में भी विदेशी निवेशकों ने की भारी बिकवाली, लेकिन इन सेक्टर्स पर दिखाया भरोसा; जानिए फ्रेश पैसे का स्रोत

अप्रैल 2023 का महीना भारतीय शेयर बाजार के लिए चुनौतीपूर्ण रहा है। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने इस महीने में लगातार बिकवाली की है, जिससे बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। इस स्थिति के बावजूद, कुछ सेक्टर्स में विदेशी निवेशकों का भरोसा बना हुआ है, जो इस माह के दौरान फ्रेश निवेश दिखाई दे रहा है।
क्या हुआ?
अप्रैल में, विदेशी निवेशकों ने लगभग 10,000 करोड़ रुपये से अधिक की बिकवाली की। इस बिकवाली का मुख्य कारण वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताएं और उच्च महंगाई दरें रही हैं। भारतीय बाजार में यह बिकवाली पिछले कुछ महीनों में देखी जा रही है, लेकिन अप्रैल में यह अपने चरम पर पहुँच गई।
कब और क्यों?
जबसे अमेरिका के फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों में बढ़ोतरी की है, तबसे वैश्विक वित्तीय बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है। इस अस्थिरता का असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा है। विदेशी निवेशकों ने भारत से पैसे निकालने का फैसला किया है, जिससे बाजार में गिरावट आई है।
कहां और किसने?
इस बिकवाली का सबसे बड़ा असर निफ्टी और सेंसेक्स जैसे प्रमुख इंडेक्स पर पड़ा है, जो पिछले हफ्ते में गिरकर महत्वपूर्ण स्तरों के नीचे आ गए। हालांकि, कुछ सेक्टर्स जैसे सूचना प्रौद्योगिकी (IT) और फार्मास्यूटिकल्स में विदेशी निवेशकों ने भरोसा दिखाया है। इन सेक्टर्स में निवेश की मात्रा बढ़ी है, जो दर्शाता है कि विदेशी निवेशक अभी भी इन क्षेत्रों को लेकर सकारात्मक हैं।
कैसे?
विशेषज्ञों का मानना है कि IT और फार्मास्यूटिकल्स सेक्टर में फ्रेश निवेश का मुख्य कारण इन सेक्टर्स की स्थिरता और विकास संभावनाएँ हैं। कई आईटी कंपनियों ने अपने तिमाही परिणामों में बेहतर प्रदर्शन किया है, जिससे विदेशी निवेशकों ने इन कंपनियों में निवेश करने का निर्णय लिया।
आम लोगों पर प्रभाव
इस बिकवाली का आम लोगों पर सीधा प्रभाव पड़ा है। जब शेयर बाजार गिरता है, तो आम निवेशकों के पोर्टफोलियो में कमी आती है। इसके अलावा, यह स्थिति आम लोगों की भावनाओं को भी प्रभावित करती है, जिससे बाजार में और भी गिरावट आ सकती है।
विशेषज्ञों की राय
मार्केट एनालिस्ट, राजेश शर्मा का कहना है, “हालांकि विदेशी निवेशक बिकवाली कर रहे हैं, लेकिन हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि भारत की अर्थव्यवस्था की बुनियाद मजबूत है। ऐसे में, जो सेक्टर्स मजबूत हैं, उनमें निवेश का मौका है।”
आगे क्या हो सकता है?
भविष्य में, यदि वैश्विक आर्थिक स्थिति में सुधार होता है, तो विदेशी निवेशकों की वापसी संभव है। हालांकि, निवेशकों को सतर्क रहना चाहिए और अपने निवेश के निर्णय सोच-समझकर लेने चाहिए।



