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FPI फिर बने सेलर, पश्चिम एशिया संकट के बीच 4 ट्रेडिंग सेशन में भारतीय शेयरों से निकाले ₹21000 करोड़

पश्चिम एशिया में संकट का असर

पश्चिम एशिया में बढ़ते संकट के बीच विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने भारतीय शेयर बाजार से बड़ी राशि की निकासी की है। चार ट्रेडिंग सेशनों में FPI ने लगभग ₹21,000 करोड़ निकाले हैं। यह स्थिति भारत के आर्थिक परिदृश्य पर गंभीर प्रभाव डाल सकती है, खासकर जब वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ रही है।

क्या हुआ, कब और कैसे?

यह वित्तीय निकासी पिछले हफ्ते से शुरू हुई, जब से इजरायल और हामास के बीच संघर्ष ने पश्चिम एशिया में तनाव को बढ़ा दिया। इस संकट ने वैश्विक निवेशकों के लिए जोखिम को उच्च बना दिया, जिसके चलते उन्होंने भारतीय शेयरों से अपने निवेश को वापस लेने का फैसला किया। FPI ने पिछले चार दिनों में लगभग 21,000 करोड़ रुपये की निकासी की है, जो कि उनके लिए एक बड़ी चिंता का विषय बन गया है।

क्यों हो रही है निकासी?

विशेषज्ञों का कहना है कि यह निकासी वैश्विक बाजारों में अस्थिरता, विशेष रूप से ऊर्जा मूल्य में वृद्धि और भू-राजनीतिक तनावों के कारण हुई है। FPI के लिए भारत एक आकर्षक बाजार है, लेकिन जब वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता बढ़ती है, तो निवेशक सुरक्षित विकल्पों की तलाश करते हैं। इस स्थिति में, FPI ने अपने निवेश को कम करने का निर्णय लिया।

आम लोगों पर असर

इस निकासी का आम लोगों पर सीधा असर पड़ सकता है। जब FPI भारतीय शेयरों से निकासी करते हैं, तो बाजार में गिरावट आ सकती है, जिससे खुदरा निवेशकों के लिए नुकसान हो सकता है। इसके अलावा, अगर यह प्रवृत्ति जारी रहती है, तो यह भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति भारतीय बैंकों पर दबाव बना सकती है, जिससे लोन की दरें प्रभावित हो सकती हैं।

विशेषज्ञों की राय

मार्केट एनालिस्ट सुनील जैन का कहना है, “पश्चिम एशिया में जारी संकट और वैश्विक बाजार की अस्थिरता ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है। यदि यह स्थिति लंबी चलती है, तो हमें भारतीय बाजार में और अधिक उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।” उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को इस स्थिति के समाधान के लिए कदम उठाने चाहिए।

भविष्य की संभावनाएं

आगे बढ़ते हुए, निवेशकों को चाहिए कि वे सतर्क रहें और अपने निवेश के निर्णयों को सोच-समझ कर लें। यदि पश्चिम एशिया में स्थिति में सुधार होता है, तो FPI फिर से भारतीय बाजार में लौट सकते हैं। लेकिन अगर तनाव जारी रहता है, तो बाजार में और गिरावट की संभावना बनी रहेगी।

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