हरीश राणा को मिली इच्छामृत्यु: एम्स में 10 दिन भर्ती रहने के बाद ली आखिरी सांस

क्या हुआ?
भारतीय समाज में इच्छामृत्यु एक संवेदनशील विषय बना हुआ है, और हाल ही में इस पर चर्चा को और बल मिला है जब प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता हरीश राणा ने इच्छामृत्यु का सहारा लिया। हरीश राणा, जो पिछले 10 दिनों से दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में भर्ती थे, ने 5 अक्टूबर 2023 को अपनी आखिरी सांस ली।
कब और कहां?
रीढ़ की गंभीर बीमारी से पीड़ित हरीश राणा को 26 सितंबर 2023 को एम्स में भर्ती कराया गया था। उनकी स्वास्थ्य स्थिति लगातार बिगड़ती चली गई, जिसके बाद उन्होंने इच्छामृत्यु का विकल्प चुना। यह मामला इस समय चर्चा में है, क्योंकि इच्छामृत्यु के विषय में भारतीय कानून में कई जटिलताएं हैं।
क्यों और कैसे?
हरीश राणा ने अपनी इच्छा व्यक्त की थी कि वह अपनी बीमारी के कारण होने वाले दर्द को सहन नहीं कर पा रहे थे। उनके परिवार ने बताया कि राणा ने अपने जीवन के अंत के लिए इच्छामृत्यु का विकल्प चुना, ताकि उन्हें और अधिक कष्ट न झेलना पड़े। यह निर्णय उनके लिए कठिन था, लेकिन उनके परिवार ने उनकी इच्छाओं का सम्मान किया।
इसका आम लोगों पर प्रभाव
इस घटना ने समाज में इच्छामृत्यु के विषय पर चर्चा को पुनः जागृत कर दिया है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि इच्छामृत्यु एक संवेदनशील मुद्दा है, जिसे समाज को समझने और स्वीकार करने की आवश्यकता है। डॉ. साक्षी शर्मा, एक प्रमुख समाजशास्त्री, ने कहा, “इस मामले ने हमारी न्यायिक प्रणाली और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए कई सवाल खड़े किए हैं।”
विशेषज्ञों की राय
इस विषय पर और भी कई विशेषज्ञों ने अपनी राय रखी है। प्रसिद्ध न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. वरुण मेहता का कहना है, “इच्छामृत्यु के मामले में हमें कानून और मानवाधिकारों के बीच संतुलन बनाना होगा।” उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार को इस विषय पर स्पष्ट नीतियां बनानी चाहिए।
आगे क्या हो सकता है?
इस घटना के बाद, उम्मीद की जा रही है कि इच्छामृत्यु से संबंधित कानूनों में बदलाव पर चर्चा होगी। यह संभव है कि सरकार इस मुद्दे पर नए दिशा-निर्देश जारी करे, ताकि भविष्य में ऐसे मामलों को सही तरीके से संभाला जा सके।



