होर्मुज में संकट के चलते भारत ने बदला मार्ग, रूसी तेल का आयात 90% बढ़ा, अन्य देशों से भी टैंकरों की भरमार

भारत का नया तेल आयात मार्ग
हाल ही में होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव और संकट के कारण भारत ने अपने तेल आयात के रास्ते में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। भारत ने अब रूसी तेल के आयात में 90% की वृद्धि की है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि संकट के समय में भारत ने अपने ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता दी है।
कब और क्यों हुआ यह परिवर्तन?
यह परिवर्तन तब आया है जब अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों ने रूस पर आर्थिक प्रतिबंध लगाए हैं। इन प्रतिबंधों के चलते भारत ने रूसी तेल के प्रति अपनी निर्भरता बढ़ाई है। साथ ही, भारत ने अन्य देशों से भी तेल आयात को बढ़ाने के लिए कदम उठाए हैं, जिससे टैंकरों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
कहाँ से आ रहा है तेल?
रूसी तेल के अलावा, भारत ने मध्य पूर्व, अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका से भी तेल का आयात करने के लिए टैंकरों की संख्या में वृद्धि की है। इससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने में सहायता मिली है।
इस बदलाव का प्रभाव
इस बदलाव का भारत की अर्थव्यवस्था पर बड़ा प्रभाव पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि रूसी तेल के आयात में वृद्धि से भारत को सस्ती ऊर्जा मिलेगी, जो महंगाई को नियंत्रित करने में मददगार साबित हो सकती है।
विशेषज्ञों की राय
एक ऊर्जा विशेषज्ञ ने कहा, “भारत की ऊर्जा नीति में यह बदलाव आवश्यक था। होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के कारण, भारत को अपनी ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता देनी थी।” इसके साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि भारत को अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए विविधता लाने की आवश्यकता है।
आगे क्या हो सकता है?
भविष्य में, अगर होर्मुज जलडमरूमध्य में स्थिति सामान्य नहीं होती है, तो भारत को और भी अधिक विकल्पों की तलाश करनी पड़ सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों पर भी ध्यान देना चाहिए, ताकि भविष्य में ऊर्जा संकट से बचा जा सके।


