National

ईरान संकट में पड़ोसी देशों की दौड़ भारत की ओर, अरबों बांटने वाला चीन क्यों नहीं आ रहा पसंद

ईरान संकट का बढ़ता प्रभाव

ईरान में चल रहे संकट ने न केवल वहां के लोगों को प्रभावित किया है, बल्कि इसके आसपास के देशों की राजनीति और अर्थव्यवस्था पर भी गहरा असर डाला है। हाल के महीनों में, ईरान में बढ़ती राजनीतिक अस्थिरता और आर्थिक संकट ने उसके पड़ोसी देशों को भारत की ओर देखने के लिए मजबूर किया है। इस संकट के बीच, भारत ने अपनी कूटनीतिक रणनीतियों को नए सिरे से परिभाषित किया है, जिससे पड़ोसी देश भारत के साथ सहयोग बढ़ाने के लिए आगे आ रहे हैं।

चीन की चुप्पी और भारत की सक्रियता

जिन देशों ने भारत की ओर रुख किया है, उनमें मुख्यतः पाकिस्तान, अफगानिस्तान और कुछ खाड़ी देशों के नाम शामिल हैं। इन देशों में भारत के प्रति बढ़ती रुचि के पीछे कई कारण हैं, जिनमें सुरक्षा, व्यापार और आर्थिक सहयोग शामिल हैं। दूसरी ओर, चीन, जो आमतौर पर ऐसे संकटों में अरबों डॉलर का निवेश करता है, इस बार चुप्पी साधे हुए है। इस चुप्पी के पीछे कई राजनीतिक और आर्थिक कारण हो सकते हैं।

क्यों बढ़ रहा है भारत की ओर रुझान?

ईरान संकट के चलते, भारत ने न केवल अपने पड़ोसी देशों के साथ संबंध मजबूत करने का प्रयास किया है, बल्कि ईरान के साथ भी अपने व्यापारिक संबंधों को बनाए रखने का प्रयास कर रहा है। भारत के प्रधानमंत्री ने हाल ही में अपने पड़ोसी देशों के नेताओं के साथ बैठकें की हैं, जहां उन्होंने आर्थिक सहयोग बढ़ाने की बात की। इस मीटिंग में भारत की भूमिका को महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि वह क्षेत्र में एक स्थिरता के प्रतीक के रूप में उभर रहा है।

आर्थिक सहयोग की संभावनाएं

भारत ने अपने पड़ोसी देशों के साथ व्यापारिक संबंधों को सुधारने के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं। इनमें से एक प्रमुख योजना है ‘मेक इन इंडिया’, जिसके तहत भारत ने कई देशों को अपने उत्पादों का निर्यात बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है। इसके अलावा, भारत ने ऊर्जा सुरक्षा के लिए भी कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं, जो ईरान से तेल आयात को सुनिश्चित करेगा।

विशेषज्ञों की राय

राजनीतिक विश्लेषक डॉ. अनिल शर्मा का कहना है, “भारत की सक्रियता इस बात का प्रमाण है कि वह दक्षिण एशिया में एक स्थिर शक्ति बनना चाहता है। चीन की चुप्पी और भारत की सक्रियता ने इस क्षेत्र में एक नया समीकरण स्थापित किया है।”

भविष्य की संभावनाएं

आगे बढ़ते हुए, यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या भारत अपने पड़ोसी देशों के साथ सहयोग को और बढ़ा सकेगा या नहीं। चीन की चुप्पी के चलते भारत को एक अवसर मिला है, जिसे वह भुनाने का प्रयास कर रहा है। यदि भारत इस मौके को सही तरीके से संभालता है, तो वह क्षेत्र में एक नई कूटनीतिक शक्ति के रूप में उभर सकता है।

WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now
Instagram Group Join Now

Priya Sharma

प्रिया शर्मा एक अनुभवी राष्ट्रीय मामलों की संवाददाता हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर करने के बाद वे पिछले 8 वर्षों से राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग कर रही हैं।

Related Articles

Back to top button