ईरान ये युद्ध नहीं हारेगा, भारत को क्या करना होगा? पूर्व RAW चीफ का विश्लेषण

ईरान और युद्ध की स्थिति
ईरान के खिलाफ चल रहे युद्ध के संदर्भ में पूर्व रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW) के प्रमुख, असीम दासगुप्ता ने हाल ही में एक बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि ईरान इस संघर्ष को नहीं हारेगा। उनके अनुसार, यह युद्ध केवल एक राजनीतिक खेल है, जिसमें वैश्विक शक्तियों की संलिप्तता है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब ईरान और उसके विरोधी देशों के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है।
क्या हो रहा है?
ईरान और उसके विरोधियों के बीच यह संघर्ष कई महीनों से जारी है। असीम दासगुप्ता का मानना है कि ईरान की सेना और उसकी रणनीतियां इस युद्ध में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उनका कहना है कि ईरान ने अपनी सैन्य क्षमता को बढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है और वह इस संघर्ष में अपने हितों की सुरक्षा करेगा।
कब और कहां?
यह संघर्ष मुख्य रूप से मध्य पूर्व में हो रहा है, जहां ईरान की सीमाएं कई देशों से जुड़ती हैं। संघर्ष का सबसे बड़ा केंद्र इराक और सीरिया का क्षेत्र है, जहां ईरान की उपस्थिति बढ़ी है। इसके अलावा, ईरान ने यमन में भी अपने प्रभाव को बढ़ाया है, जिससे उसकी स्थिति और मजबूत हुई है।
क्यों और कैसे?
आगे बताते हुए दासगुप्ता ने कहा कि ईरान का यह कदम उसकी क्षेत्रीय सुरक्षा को बनाए रखने के लिए आवश्यक है। उन्हें यह भी लगता है कि भारत को इस संघर्ष में अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। भारत, जो कि ईरान का एक महत्वपूर्ण साझीदार है, को चाहिए कि वह इस युद्ध के नतीजों को ध्यान में रखकर अपनी विदेश नीति को नया स्वरूप दे।
क्या असर होगा?
इस युद्ध का प्रभाव केवल ईरान और उसके विरोधियों तक सीमित नहीं रहेगा। यह संघर्ष वैश्विक स्तर पर ऊर्जा बाजारों को भी प्रभावित कर सकता है। यदि युद्ध बढ़ता है, तो तेल की कीमतों में वृद्धि संभव है, जो भारत जैसे विकासशील देशों के लिए चिंता का विषय है। इसके अलावा, भारत को ईरान के साथ अपने व्यापारिक संबंधों को भी संतुलित करना होगा।
विशेषज्ञ की राय
विशेषज्ञों का मानना है कि इस समय भारत को एक संतुलित दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। पूर्व RAW चीफ ने कहा, “भारत को अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए एक सक्रिय भूमिका निभानी होगी। हमें ईरान और अन्य देशों के बीच संतुलन बनाए रखना होगा।”
आगे क्या?
यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि भारत इस चुनौती का सामना कैसे करता है। अगर भारत ईरान के साथ अपने संबंधों को मजबूत करता है, तो यह उसके लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। लेकिन अगर स्थिति बिगड़ती है, तो भारत को अपनी रणनीति में बदलाव करना पड़ सकता है।



