क्या इजरायल लेबनान में ‘नया गाजा’ बना रहा है? तबाही, पलायन और बदलती जंग की तस्वीर

हाल के दिनों में लेबनान में इजरायल की सैन्य गतिविधियों ने एक नया संकट उत्पन्न कर दिया है, जिसे कुछ विशेषज्ञ ‘नया गाजा’ कह रहे हैं। हालात तेजी से बिगड़ रहे हैं, जिसमें नागरिकों का पलायन, तबाही और खतरनाक संघर्ष शामिल हैं। यह स्थिति न केवल लेबनान बल्कि पूरे मध्य पूर्व में अस्थिरता का कारण बन सकती है।
क्या हो रहा है?
इजरायली सेना ने हाल में लेबनान के दक्षिणी हिस्सों में बड़े पैमाने पर हवाई हमले शुरू किए हैं। यह हमले मुख्य रूप से हिज़्बुल्लाह के ठिकानों पर केंद्रित हैं, जिन्हें इजरायल एक खतरे के रूप में देखता है। इन हमलों के परिणामस्वरूप, कई नागरिकों ने अपने घर छोड़े हैं और शरणार्थी बनने के लिए मजबूर हुए हैं।
कब और कहां?
यह संकट पिछले कुछ हफ्तों से बढ़ रहा है, लेकिन इजरायल के हवाई हमले 2023 के अक्टूबर महीने की शुरुआत से तेज हुए हैं। लेबनान के दक्षिणी क्षेत्रों जैसे कि नाबातिया और ताइफ में सबसे अधिक तबाही देखी जा रही है। यहाँ के लोग बुनियादी आवश्यकताओं के लिए भी संघर्ष कर रहे हैं।
क्यों और कैसे?
इजरायल का मानना है कि हिज़्बुल्लाह, जो ईरान से समर्थित एक शिया समूह है, उसकी सुरक्षा के लिए खतरा बन गया है। इजरायली अधिकारियों का कहना है कि हिज़्बुल्लाह ने हाल में सीमा पर कई हमले किए हैं, इसलिए इजरायल ने इन ठिकानों को नष्ट करने का फैसला किया है। इस सब के कारण, आम नागरिकों का जीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।
किसने क्या कहा?
विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति केवल इजरायल और लेबनान के लिए नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए चिंताजनक है। एक राजनीतिक विश्लेषक, डॉ. राहुल शर्मा ने कहा, “अगर यह संघर्ष बढ़ता है, तो यह सिर्फ लेबनान तक सीमित नहीं रहेगा। इससे पूरे मध्य पूर्व में अस्थिरता फैल सकती है।”
आसान जनता पर प्रभाव
इस संकट का प्रभाव सीधे तौर पर आम नागरिकों पर पड़ रहा है। लोग अपने घरों से भागने को मजबूर हैं और कई परिवारों को एक-दूसरे से अलग होना पड़ रहा है। इससे मानवीय संकट गहरा होता जा रहा है। भोजन, पानी और चिकित्सा सेवाओं की कमी हो रही है।
आगे क्या हो सकता है?
आगामी समय में, अगर संघर्ष और बढ़ता है, तो क्षेत्र में और अधिक शरणार्थी संकट देखने को मिल सकता है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इस स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सक्रिय रूप से हस्तक्षेप करना होगा। हालाँकि, वर्तमान में कोई स्पष्ट समाधान नजर नहीं आ रहा है।


