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सुप्रीम कोर्ट ने COVID-19 टीकाकरण के गंभीर दुष्प्रभावों के लिए ‘नो-फॉल्ट मुआवजा नीति’ बनाने का केंद्र को दिया निर्देश

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में COVID-19 टीकाकरण के दौरान होने वाले गंभीर दुष्प्रभावों के लिए केंद्र सरकार को ‘नो-फॉल्ट मुआवजा नीति’ विकसित करने का निर्देश दिया है। यह निर्णय उस समय आया है जब भारत ने टीकाकरण अभियान को तेजी से आगे बढ़ाया है, लेकिन इसके साथ ही कुछ गंभीर दुष्प्रभावों की भी रिपोर्ट्स आई हैं।

क्या है नो-फॉल्ट मुआवजा नीति?

‘नो-फॉल्ट मुआवजा नीति’ का तात्पर्य है कि यदि कोई व्यक्ति टीके के कारण गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करता है, तो उसे मुआवजा दिया जाएगा, चाहे यह प्रभाव जानबूझकर हो या न हो। यह नीति उन लोगों के लिए सुरक्षा कवच प्रदान करेगी जो टीकाकरण के बाद स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना कर रहे हैं।

कब और क्यों आया यह निर्णय?

यह आदेश 5 अक्टूबर 2023 को सुनवाई के दौरान जारी किया गया, जब सुप्रीम कोर्ट ने देखा कि COVID-19 टीकाकरण के दुष्प्रभावों के मामलों में बढ़ोतरी हो रही है। कोर्ट ने कहा कि सरकार को ऐसे मामलों की गंभीरता को समझना चाहिए और लोगों को उचित मुआवजा देने की व्यवस्था करनी चाहिए।

पिछले घटनाक्रम

भारत सरकार ने 2021 में COVID-19 टीकाकरण अभियान शुरू किया था, जिसके तहत लाखों लोगों को टीका लगाया गया। हालांकि, इसके बाद कुछ मामलों में टीकाकरण के दुष्प्रभावों की शिकायतें भी मिलीं। कई परिवारों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया, जिसमें उन्होंने टीकाकरण के कारण स्वास्थ्य समस्याओं के लिए मुआवजे की मांग की।

इस फैसले का प्रभाव

इस आदेश का प्रभाव आम लोगों पर काफी गहरा पड़ सकता है। इससे लोगों में टीकाकरण के प्रति विश्वास बढ़ सकता है, क्योंकि उन्हें अब यह आश्वासन दिया गया है कि यदि टीके के कारण कोई समस्या होती है, तो उन्हें मुआवजा मिलेगा। इसके अलावा, यह नीति सरकार को भी जवाबदेह बनाएगी।

विशेषज्ञों की राय

स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. राधिका मेहता का कहना है, “इस नीति से यह स्पष्ट हो जाएगा कि सरकार अपने नागरिकों के स्वास्थ्य की कितनी परवाह करती है। यह निर्णय एक सकारात्मक कदम है, जिससे लोगों का टीकाकरण की ओर रुझान बढ़ सकता है।” वहीं, कुछ आलोचकों ने इसे एक अस्थायी समाधान भी बताया है।

आगे क्या हो सकता है?

आगे जाकर, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि केंद्र सरकार इस नीति को कैसे लागू करती है और मुआवजे की प्रक्रिया को कैसे सुचारू बनाती है। यदि सरकार इस दिशा में ठोस कदम उठाती है, तो यह न केवल COVID-19 के खिलाफ लड़ाई को मजबूत करेगा, बल्कि भविष्य के टीकाकरण अभियानों के लिए भी एक उदाहरण बनेगा।

इस निर्णय से यह भी संभावना है कि अन्य देशों में भी ऐसी नीतियों को लागू करने की मांग उठेगी, जिससे वैश्विक स्तर पर टीकाकरण के प्रति लोगों का विश्वास बढ़ सकेगा।

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