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‘बच्चा सिर्फ मां का नहीं होता’, राघव चड्ढा ने पैटरनिटी लीव पर उठाई आवाज, परिणीति चोपड़ा गर्व से झूमीं

राघव चड्ढा ने पैटरनिटी लीव पर उठाई आवाज

हाल ही में आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता राघव चड्ढा ने पैटरनिटी लीव के महत्व पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि ‘बच्चा सिर्फ मां का नहीं होता’, बल्कि पिता की भी जिम्मेदारी होती है। इस बयान ने न केवल राजनीतिक हलकों में हलचल मचाई है, बल्कि समाज में भी बहस को जन्म दिया है।

क्या है पैटरनिटी लीव?

पैटरनिटी लीव एक ऐसी छुट्टी है जो पिता को बच्चे के जन्म के समय अपनी पत्नी और नवजात शिशु की देखभाल के लिए दी जाती है। यह लीव आमतौर पर कुछ हफ्तों की होती है, लेकिन कई देशों में इसे बढ़ाने की मांग उठती रहती है। राघव चड्ढा ने इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि समाज में यह आवश्यक है कि पिता की भी भूमिका को पहचाना जाए।

कब और कहां?

राघव चड्ढा ने यह बयान हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान दिया, जहां उन्होंने इस मुद्दे पर अपनी बात रखी। इस कार्यक्रम में कई प्रमुख हस्तियों ने भाग लिया, जिनमें परिणीति चोपड़ा भी शामिल थीं। परिणीति ने इस मुद्दे पर राघव का समर्थन करते हुए कहा कि यह सम्मानजनक और आवश्यक है।

क्यों जरूरी है पैटरनिटी लीव?

पैटरनिटी लीव की मांग केवल व्यक्तिगत स्तर पर नहीं, बल्कि सामाजिक स्तर पर भी महत्वपूर्ण है। जब पिता अपने बच्चे के जन्म के समय घर पर होते हैं, तो यह न केवल मां को मानसिक और शारीरिक रूप से सहारा देता है, बल्कि पिता और बच्चे के बीच के रिश्ते को भी मजबूत बनाता है। इससे बच्चे के विकास पर भी सकारात्मक असर पड़ता है।

कैसे हो सकता है बदलाव?

राघव चड्ढा का यह बयान इस दिशा में एक सकारात्मक कदम है कि समाज में चर्चा हो। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सरकार पैटरनिटी लीव को अनिवार्य बनाती है, तो यह न केवल कामकाजी माता-पिता के लिए फायदेमंद होगा, बल्कि इससे समाज में समानता भी आएगी।

अगले कदम क्या हो सकते हैं?

इस मुद्दे पर यदि सरकार ध्यान देती है, तो आने वाले समय में पैटरनिटी लीव को कानूनी रूप से लागू किया जा सकता है। इससे न केवल पिता, बल्कि बच्चों को भी इसका लाभ मिलेगा। राघव चड्ढा के इस बयान ने समाज में एक नई बहस को जन्म दिया है, जो आने वाले समय में और भी गहराई में जा सकती है।

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Priya Sharma

प्रिया शर्मा एक अनुभवी राष्ट्रीय मामलों की संवाददाता हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर करने के बाद वे पिछले 8 वर्षों से राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग कर रही हैं।

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