कुर्सी के डर से जो नोएडा नहीं आए…, जेवर एयरपोर्ट पर नहीं थम रही रार, अब CM योगी का अखिलेश पर वार

जेवर एयरपोर्ट पर जारी राजनीतिक खींचतान
उत्तर प्रदेश के जेवर एयरपोर्ट को लेकर चल रही राजनीतिक रार अब एक नई मोड़ पर पहुँच गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा हमला किया है। यह विवाद तब शुरू हुआ जब अखिलेश यादव ने जेवर एयरपोर्ट को लेकर सवाल उठाए और इसे अपने राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा बनाया।
क्या हुआ?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में एक सार्वजनिक सभा में अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि जो नेता कुर्सी के डर से नोएडा नहीं आए, वे अब जेवर एयरपोर्ट के विकास में रोड़ा अटकाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी सरकार ने इस परियोजना को तेजी से आगे बढ़ाने का काम किया है और यह यूपी की आर्थिक प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
कब और कहां?
यह घटना पिछले हफ्ते हुई जब योगी आदित्यनाथ जेवर एयरपोर्ट के उद्घाटन की तैयारी को लेकर एक कार्यक्रम में शामिल हुए। इस कार्यक्रम में उन्होंने एयरपोर्ट के महत्व और इसके लाभों पर चर्चा की। उन्होंने यह भी बताया कि कैसे यह एयरपोर्ट न केवल नोएडा बल्कि पूरे यूपी के लिए एक गेम चेंजर साबित होगा।
क्यों हो रही है यह रार?
राजनीतिक रार का मुख्य कारण यह है कि जेवर एयरपोर्ट को लेकर समाजवादी पार्टी ने इसे अपने चुनावी मुद्दों में शामिल कर लिया है। अखिलेश यादव ने आरोप लगाया है कि भाजपा सरकार ने इस प्रोजेक्ट में उनकी सरकार के कामों को नजरअंदाज किया है। ऐसे में यह साफ है कि दोनों पार्टियों के बीच एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।
कैसे हो रहा है इस विवाद का असर?
इस विवाद का असर आम लोगों पर भी पड़ रहा है। एयरपोर्ट के निर्माण से स्थानीय लोगों को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे और इससे क्षेत्र की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। लेकिन राजनीतिक खींचतान के चलते प्रोजेक्ट की प्रगति पर असर पड़ सकता है। स्थानीय व्यवसायियों का कहना है कि यदि यह विवाद खत्म नहीं होता है, तो इससे विकास कार्यों में देरी हो सकती है।
विशेषज्ञों की राय
राजनीतिक विश्लेषक डॉ. सतीश शर्मा का कहना है कि इस प्रकार की राजनीतिक खींचतान का असर केवल चुनावी माहौल पर नहीं, बल्कि स्थानीय विकास पर भी पड़ता है। उन्होंने कहा, “यदि ये नेता अपने व्यक्तिगत लाभ के लिए विकास के कामों में अड़चन डालते हैं, तो इसका नुकसान आम जनता को होगा।”
आगे क्या हो सकता है?
आने वाले दिनों में यह देखना होगा कि क्या दोनों पार्टियां इस विवाद को सुलझाने में सफल होती हैं या नहीं। अगर यह खींचतान जारी रहती है, तो यह एयरपोर्ट के विकास में बाधा डाल सकती है, जिससे स्थानीय लोगों को नुकसान होगा। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यह मामला चुनावों में भी एक महत्वपूर्ण मुद्दा बनेगा।



