‘सरके चुनर तेरी’ गाने पर राष्ट्रीय महिला आयोग की कड़ी फटकार, नोरा और संजय दत्त को दिया गया अंतिम अवसर

क्या है विवाद?
हाल ही में रिलीज़ हुए गाने ‘सरके चुनर तेरी’ ने एक बार फिर विवादों का सामना किया है। इस गाने में न केवल गायक की आवाज़ बल्कि उसके बोल भी महिलाओं के लिए अपमानजनक माने जा रहे हैं। राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने इस गाने को लेकर कड़ी आपत्ति जताई है और इसे तुरंत हटाने की मांग की है। आयोग का कहना है कि इस प्रकार के गाने समाज में महिलाओं के प्रति नकारात्मक सोच को बढ़ावा देते हैं।
कब और कहां हुआ यह विवाद?
यह विवाद तब शुरू हुआ जब गाना 1 अक्टूबर 2023 को रिलीज़ हुआ। इसके रिलीज़ होते ही सोशल मीडिया पर इसकी आलोचना तेज हो गई। कई लोगों ने इसे महिलाओं के प्रति असम्मानजनक बताया और गाने के बोलों में सुधार की मांग की।
क्यों है यह विवादित?
गाने में उपयोग किए गए शब्द और उनके अर्थ ने इसे बेतुका और अपमानजनक बना दिया है। महिला आयोग ने कहा है कि इस गाने में जो संदेश दिया जा रहा है, वह न केवल महिला सशक्तिकरण के खिलाफ है, बल्कि यह समाज में गहरी misogyny को भी बढ़ावा देता है।
किसने किया विरोध?
राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने इस गाने की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा, “इस गाने के बोल महिलाओं को वस्तु के रूप में पेश करते हैं। ऐसे गाने समाज में नकारात्मक विचारधारा को बढ़ाते हैं।” इसके अलावा, कई सामाजिक संगठनों और महिला अधिकारों के कार्यकर्ताओं ने भी इस गाने के खिलाफ आवाज उठाई है।
गाने का प्रभाव और आम लोगों पर इससे क्या असर?
इस विवाद का समाज पर गहरा असर पड़ सकता है। जहां एक ओर यह गाना कुछ लोगों के लिए मनोरंजन का माध्यम है, वहीं दूसरी ओर यह महिलाओं के प्रति समाज की सोच को भी दर्शाता है। जब ऐसे गाने बड़े पैमाने पर प्रसारित होते हैं, तो यह युवा पीढ़ी पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं।
विशेषज्ञों की राय
महिला अधिकारों की विशेषज्ञ डॉ. अनन्या वर्मा ने कहा, “इस प्रकार के गाने न केवल महिलाओं के प्रति असम्मान को बढ़ावा देते हैं, बल्कि यह उन सामाजिक मान्यताओं को भी मजबूत करते हैं जो महिलाओं को कमजोर और हाशिए पर रखती हैं। हमें इस प्रकार के कंटेंट के खिलाफ सख्त कदम उठाने की आवश्यकता है।”
आगे क्या हो सकता है?
राष्ट्रीय महिला आयोग ने गाने के निर्माताओं, नोरा फतह और संजय दत्त को एक अंतिम मौका दिया है कि वे इस गाने के बोलों में सुधार करें। यदि उन्हें समय पर जवाब नहीं मिलता है, तो आयोग कानूनी कार्रवाई करने का भी मन बना सकता है। इस मामले में आगे की कार्यवाही इस बात पर निर्भर करेगी कि निर्माता इस विवाद को कैसे संभालते हैं।



