स्टॉक मार्केट में गिरावट: ट्रंप के कट्टर दुश्मन पॉवेल ने चुभाया सुई, US में उठा तूफान, सेंसेक्स-निफ्टी भी क्रैश

क्या हुआ?
हाल ही में अमेरिकी फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष जेरोम पॉवेल द्वारा दिए गए संकेतों ने वैश्विक स्टॉक मार्केट को जबर्दस्त झटका दिया है। पॉवेल के बयान के बाद, भारतीय शेयर बाजार भी इससे अछूते नहीं रहे और सेंसेक्स एवं निफ्टी में भारी गिरावट देखने को मिली। सेंसेक्स लगभग 1000 अंक गिरकर 58,000 के नीचे चला गया, जबकि निफ्टी भी 300 अंक से अधिक गिरकर 17,200 के स्तर तक पहुंच गया।
कब और क्यों?
ये घटनाक्रम तब हुआ जब पॉवेल ने यह स्पष्ट किया कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक आगे भी ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है। उनकी इस चेतावनी ने निवेशकों के बीच चिंता का माहौल पैदा कर दिया। इससे पहले भी, अमेरिका में महंगाई के उच्च स्तर और आर्थिक विकास की धीमी गति ने बाजार को प्रभावित किया था।
कहां हुआ?
यह गिरावट मुख्यतः न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज और नैस्डैक से शुरू हुई, जहां अमेरिकी बाजारों में गिरावट ने वैश्विक स्तर पर असर डाला। भारतीय बाजारों में इस गिरावट का सीधा असर पड़ा, जिससे घरेलू निवेशकों में भी बेचैनी का माहौल बना। खासकर, बैंकिंग, आईटी और ऑटोमोबाइल सेक्टर में गिरावट ने निवेशकों को चिंता में डाल दिया।
कैसे हुआ?
पॉवेल के बयान के कारण निवेशकों ने अपने पोर्टफोलियो को समायोजित करना शुरू कर दिया। कई निवेशकों ने मुनाफा वसूल करना शुरू कर दिया और बिकवाली का दौर शुरू हो गया। इससे बाजार में अस्थिरता बढ़ गई। ज्यादातर विश्लेषकों का मानना है कि जब तक फेडरल रिजर्व आर्थिक संकेतकों पर ध्यान नहीं देता, तब तक बाजार में स्थिरता नहीं आएगी।
इसका आम लोगों पर क्या असर होगा?
इस गिरावट का आम लोगों पर सीधा असर पड़ेगा। जिन लोगों ने स्टॉक मार्केट में निवेश किया है, उन्हें अपने निवेश की वैल्यू में कमी का सामना करना पड़ सकता है। इससे रिटायरमेंट फंड, शिक्षा बचत योजनाओं और अन्य दीर्घकालिक निवेशों पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। इसके अलावा, यदि बाजार में ये गिरावट जारी रहती है, तो यह उपभोक्ता खर्च को भी प्रभावित कर सकती है।
विशेषज्ञों की राय
आर्थिक विशेषज्ञ डॉ. आर्यन वर्मा का मानना है कि “अमेरिका में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना से भारतीय बाजार पर दबाव बढ़ा है। यदि फेडरल रिजर्व अपने रुख को नरम नहीं करता है, तो हमें आने वाले समय में और भी गिरावट देखने को मिल सकती है।”
आगे क्या हो सकता है?
भविष्य में, यदि अमेरिकी बाजार में स्थिरता नहीं आती, तो भारतीय बाजार भी इसी प्रकार की अस्थिरता का सामना कर सकते हैं। निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे अपने पोर्टफोलियो में विविधता लाएं और सतर्क रहें। आने वाले महीनों में, आर्थिक आंकड़ों और फेडरल रिजर्व की बैठकों पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा।



