लिव-इन रिलेशनशिप में जन्मा बच्चा ‘नाजायज नहीं’, उसके अधिकार सुरक्षित: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला
भारतीय सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है जिसमें कहा गया है कि लिव-इन रिलेशनशिप में पैदा हुए बच्चे को नाजायज नहीं माना जाएगा। इस फैसले ने न केवल कानूनी दृष्टिकोण से बल्कि सामाजिक दृष्टिकोण से भी एक नई बहस को जन्म दिया है।
क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने?
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि लिव-इन रिलेशनशिप में जन्मे बच्चों के अधिकार सुरक्षित होते हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि ऐसे बच्चों को अपने माता-पिता से समान अधिकार प्राप्त हैं जैसे कि वैवाहिक संबंध में जन्मे बच्चों को होते हैं। इस फैसले का उद्देश्य समाज में लिव-इन रिलेशनशिप को एक मान्यता देना और बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा करना है।
कब और कहां हुआ फैसला?
यह फैसला 2023 में सुनाया गया था जब एक याचिका पर सुनवाई चल रही थी। याचिकाकर्ता ने कोर्ट में यह सवाल उठाया था कि क्या लिव-इन रिलेशनशिप में पैदा हुए बच्चे को नाजायज माना जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर विचार करते हुए अपने निर्णय में लिव-इन रिलेशनशिप के बढ़ते प्रचलन और उनके सामाजिक प्रभाव को ध्यान में रखा।
क्यों है यह फैसला महत्वपूर्ण?
भारत में लिव-इन रिलेशनशिप पर अभी भी समाज में कई हिचकिचाहटें हैं। इस फैसले ने उन बच्चों के अधिकारों को मान्यता दी है जो ऐसे संबंधों में पैदा हुए हैं। इससे यह संदेश जाता है कि समाज को लिव-इन रिलेशनशिप को एक वैध रूप के रूप में स्वीकार करना चाहिए।
विशेषज्ञों की राय
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला समाज में एक सकारात्मक बदलाव लाएगा। एक कानूनी विशेषज्ञ ने कहा, “यह फैसला लिव-इन रिलेशनशिप में जन्मे बच्चों के अधिकारों को सुरक्षा प्रदान करता है और उन्हें अपने परिवार से जुड़े रहने का अधिकार देता है।”
आगे की संभावनाएं
इस फैसले के बाद, उम्मीद की जा रही है कि लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर समाज में और अधिक जागरूकता बढ़ेगी। भविष्य में, कानून में और सुधार हो सकते हैं जो ऐसे संबंधों को और भी मान्यता देंगे। इसके अलावा, यह निर्णय अन्य न्यायालयों के लिए भी एक उदाहरण बन सकता है।



