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‘आधी रात को ऐसी याचिकाएं ड्राफ्ट करते हो?’ प्याज-लहसुन पर PIL देख भड़का सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट की आपत्ति

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में प्याज और लहसुन की कीमतों में वृद्धि को लेकर दायर की गई जनहित याचिका (PIL) पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। कोर्ट ने सवाल उठाया कि क्या आधी रात को ऐसी याचिकाएं ड्राफ्ट की जाती हैं, जो केवल राजनीतिक लाभ के लिए होती हैं। यह याचिका देशभर में प्याज और लहसुन की बढ़ती कीमतों के खिलाफ दायर की गई थी, जो आम जनता के लिए एक गंभीर चिंता का विषय बन चुकी है।

क्या है मामला?

यह याचिका दिल्ली हाई कोर्ट में दायर की गई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि सरकार ने महंगाई को नियंत्रित करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए हैं। याचिका में मांग की गई थी कि सरकार प्याज और लहसुन की कीमतों को नियंत्रित करे और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति को सुनिश्चित करे। याचिकाकर्ता ने कोर्ट के सामने दलील दी कि खाने की सामग्री की बढ़ती कीमतें आम आदमी की जीवनशैली पर गंभीर असर डाल रही हैं।

सुप्रीम कोर्ट की प्रतिक्रिया

सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए गहरी नाराजगी जताई। जस्टिस ने कहा, “क्या आप आधी रात को इस तरह की याचिकाएं तैयार करते हैं?” कोर्ट ने यह भी कहा कि ऐसी याचिकाएं राजनीतिक स्वार्थ के लिए होती हैं, जो समस्याओं का समाधान नहीं करतीं। कोर्ट ने याचिकाकर्ता से यह भी पूछा कि क्या उन्होंने पहले संबंधित विभाग से संपर्क किया था।

पिछले घटनाक्रम

देश में प्याज और लहसुन की कीमतों में पिछले कुछ महीनों में जबरदस्त वृद्धि हुई है। नवंबर 2023 में प्याज की कीमतें 80 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई थीं, जबकि लहसुन की कीमतें भी 200 रुपये प्रति किलोग्राम के करीब जा पहुँच गई थीं। यह स्थिति तब उत्पन्न हुई जब मानसून के दौरान फसल को भारी नुकसान हुआ था। सरकार ने पहले ही कई राज्यों में प्याज और लहसुन की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए कदम उठाने का आश्वासन दिया था, लेकिन आम जनता को राहत नहीं मिल पाई।

जनता पर प्रभाव

इस मामले का आम जनता पर गहरा असर पड़ा है। महंगाई की मार झेल रहे लोगों के लिए प्याज और लहसुन जैसे आवश्यक खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतें चिंता का विषय हैं। रसोई घरों में प्याज और लहसुन की कमी के कारण कई घरों में खाना बनाना भी मुश्किल हो गया है। ऐसे में, अगर सरकार ने समय पर उचित कदम नहीं उठाए, तो यह स्थिति और बिगड़ सकती है।

विशेषज्ञों की राय

आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार को आवश्यक वस्तुओं की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए ठोस नीतियां बनानी चाहिए। अर्थशास्त्री डॉ. राधिका वर्मा ने कहा, “महंगाई पर नियंत्रण पाने के लिए सरकार को आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने की आवश्यकता है। अगर सरकार समय पर कदम नहीं उठाती है, तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।”

आगे का रास्ता

सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद अब यह देखना होगा कि सरकार इस मुद्दे पर क्या कदम उठाती है। क्या सरकार आवश्यक वस्तुओं की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए कोई ठोस योजना बनाती है, या फिर यह मामला सिर्फ कोर्ट में ही अटका रहेगा? जनता की निगाहें अब सरकार के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।

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