अमरोहा में किशोर को सांप के डसे के बाद 12 घंटे गंगा में डुबोकर रखा गया, ‘जहर उतारने’ का टोटका चलता रहा; अंत में शव को बहाया गया

घटना का विवरण
उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले में एक किशोर को सांप के डसे जाने के बाद उस पर एक अजीबोगरीब उपचार का प्रयोग किया गया। स्थानीय परंपरा के अनुसार, परिजनों ने उसे 12 घंटे तक गंगा नदी में डुबोकर रखा, यह मानते हुए कि इससे उसका जहर उतरेगा। यह घटना कई सवाल खड़े करती है, खासकर यह कि इस तरह के टोटकों का क्या प्रभाव होता है और क्या यह किसी भी तरह से चिकित्सा के लिए उचित है।
घटना कब और कैसे हुई?
यह घटना पिछले सप्ताह हुई जब 15 वर्षीय किशोर को सांप ने डस लिया। परिजनों ने तुरंत उसे गंगा नदी ले जाकर उस पर ‘जहर उतारने’ का टोटका करने का निर्णय लिया। बताया गया है कि किशोर को डसने के बाद उसकी स्थिति गंभीर हो गई थी, लेकिन परिजनों ने उसे अस्पताल ले जाने के बजाय इस प्रथा को अपनाया।
क्यों किया गया ऐसा?
स्थानीय लोगों का मानना है कि गंगा नदी का पानी पवित्र होता है और इससे जहर को बाहर निकालने में मदद मिलती है। हालांकि, चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि यह एक गलत धारणा है। उन्होंने चेतावनी दी है कि ऐसे प्रथाओं से समय बर्बाद होता है और मरीज की हालत बिगड़ सकती है।
पारिवारिक दृष्टिकोण
किशोर के परिवार ने बताया कि उन्हें विश्वास था कि इस प्रक्रिया से उनका बेटा ठीक हो जाएगा। एक स्थानीय निवासी ने कहा, “हमारे पूर्वजों ने इस तरह के उपचार को सदियों से अपनाया है। हमें लगता है कि यह काम करेगा।” लेकिन इस मामले में, किशोर की हालत बिगड़ गई और अंततः उसकी मृत्यु हो गई।
प्रभाव और समाज पर असर
यह घटना एक बार फिर से समाज में प्रचलित अंधविश्वासों पर रोशनी डालती है। ऐसे मामलों में, लोग अक्सर समय गंवाते हैं और सही चिकित्सा की प्रक्रिया को नजरअंदाज करते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यह समय रहते उचित इलाज न मिलने के कारण हो सकता है।
विशेषज्ञों की राय
एक चिकित्सक ने इस बारे में बात करते हुए कहा, “सांप के डसे जाने पर तुरंत अस्पताल ले जाना चाहिए। समय बर्बाद करने से जान का खतरा बढ़ जाता है। लोगों को अंधविश्वासों से बचना चाहिए और वैज्ञानिक तरीकों को अपनाना चाहिए।”
आगे क्या हो सकता है?
इस घटना के बाद, उम्मीद की जा रही है कि जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे ताकि लोग अंधविश्वासों के बजाय चिकित्सा विज्ञान पर भरोसा करें। समाज में ऐसे मामलों की रोकथाम के लिए शिक्षा और जागरूकता बहुत आवश्यक है।



