हाइब्रिड युद्ध के माध्यम से ईरान को तोड़ने की कोशिश में ट्रंप, कुर्दों ने अमेरिका को दिया धोखा

क्या हुआ?
पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रणनीति में ईरान को कमजोर करना और कुर्दों के जरिए हाइब्रिड युद्ध की परिकल्पना शामिल थी। यह खुलासा हाल ही में सामने आई एक रिपोर्ट में हुआ है, जिसमें बताया गया है कि ट्रंप प्रशासन ने कुर्दों को अमेरिका का सहयोगी मानकर उन्हें ईरान के खिलाफ एक औजार के रूप में उपयोग करने की योजना बनाई थी।
कब और कहां?
यह स्थिति पिछले कुछ वर्षों में विकसित हुई, विशेषकर 2016 से 2020 के बीच, जब ट्रंप ने ईरान के खिलाफ कठोर नीतियां अपनाई थीं। इस दौरान अमेरिका ने कुर्दों के साथ मिलकर ईरान के प्रभाव को सीमित करने का प्रयास किया, जिसमें सीरिया और इराक जैसे क्षेत्रों में कुर्दों की भूमिका प्रमुख रही।
क्यों और कैसे?
ट्रंप ने ईरान को कमजोर करने के लिए कुर्दों का सहारा लिया क्योंकि उन्हें विश्वास था कि कुर्द, जो कि ईरान के पड़ोसी देशों में रहते हैं, ईरान के खिलाफ एक प्रभावी बल बन सकते हैं। अमेरिका ने कुर्दों को सैन्य और आर्थिक सहायता प्रदान की, लेकिन अब यह सामने आ रहा है कि कुर्दों ने अमेरिका को धोखा दिया। रिपोर्ट के अनुसार, कुर्दों ने अपनी स्वायत्तता की रक्षा के लिए ईरान के साथ गुप्त वार्ता की थी।
क्या प्रभाव पड़ेगा?
इस घटनाक्रम का आम लोगों पर गहरा असर पड़ेगा। यदि कुर्द ईरान के साथ संबंध बढ़ाते हैं, तो यह क्षेत्रीय सुरक्षा को खतरे में डाल सकता है। इससे अमेरिका की विदेश नीति पर सवाल उठेंगे और ईरान के खिलाफ अमेरिका की रणनीतियों की प्रभावशीलता में कमी आ सकती है।
विशेषज्ञों की राय
एक विशेषज्ञ ने बताया, “कुर्दों की यह हरकत अमेरिका के लिए भ्रामक साबित हो सकती है। अमेरिका को अब अपनी रणनीति में बदलाव लाने की आवश्यकता है। यदि कुर्द ईरान के साथ संबंध बढ़ाते हैं, तो अमेरिका को अपने सहयोगियों पर भरोसा करने में कठिनाई होगी।”
आगे क्या हो सकता है?
आने वाले समय में अमेरिका को अपनी विदेश नीति में बदलाव लाने की आवश्यकता होगी। यदि कुर्दों का ईरान के साथ संबंध मजबूत होता है, तो अमेरिका को अपने अन्य सहयोगियों को भी संज्ञान में लेना होगा। इसके अलावा, यह भी संभव है कि अमेरिका ने नए रणनीतिक साझेदारों को खोजना शुरू कर दे, जो ईरान के खिलाफ उनकी नीतियों में मदद कर सकें।



