आखिरी उम्मीद भी समाप्त, होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने के लिए UNSC में मतदान, रूस-चीन ने किया VETO

संक्षिप्त पृष्ठभूमि
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में हाल ही में होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने के लिए एक प्रस्ताव पर मतदान हुआ। इस प्रस्ताव का उद्देश्य क्षेत्र में बढ़ते तनाव को कम करना और अंतरराष्ट्रीय जल परिवहन को सुगम बनाना था। हालांकि, मतदान के दौरान रूस और चीन ने अपने वीटो का उपयोग करते हुए इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया, जिससे इस मुद्दे पर चर्चा और समाधान की संभावनाएं समाप्त हो गईं।
क्या हुआ?
यह मतदान 15 अक्टूबर 2023 को हुआ, जब UNSC के सदस्यों ने होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से होने वाले व्यापार और परिवहन को सुरक्षित करने के लिए एक प्रस्ताव पर विचार किया। इस प्रस्ताव का समर्थन पश्चिमी देशों, विशेषकर अमेरिका और उसके सहयोगियों ने किया था। लेकिन रूस और चीन ने अपने वीटो का इस्तेमाल करते हुए इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया।
क्यों हुआ यह मतदान?
हाल के महीनों में, होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव बढ़ा है, खासकर ईरान और पश्चिमी देशों के बीच। जलडमरूमध्य का स्थान रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह दुनिया के लगभग 20% तेल का परिवहन करता है। प्रस्ताव का उद्देश्य क्षेत्र में शांति स्थापित करना और समुद्री परिवहन को सुरक्षित बनाना था। लेकिन रूस और चीन का निर्णय दर्शाता है कि वे इस विषय पर अलग-अलग दृष्टिकोण रखते हैं।
इसका क्या प्रभाव होगा?
इस वीटो के बाद, विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम वैश्विक बाजारों पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ेगा। आम लोगों के लिए, इसका मतलब यह हो सकता है कि ईंधन की कीमतें और अधिक बढ़ेंगी, जिससे दैनिक जीवन पर असर पड़ेगा। इसके अलावा, यह संकेत देता है कि वैश्विक शक्ति संतुलन में परिवर्तन आ रहा है, और अमेरिका तथा उसके सहयोगियों के लिए इसे स्वीकार करना कठिन होगा।
विशेषज्ञों की राय
प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञ डॉ. राघव शर्मा ने कहा, “यह वीटो केवल एक राजनीतिक निर्णय नहीं है, बल्कि यह एक संकेत है कि रूस और चीन एक नया वैश्विक आदेश स्थापित करने की दिशा में अग्रसर हैं।” उन्होंने आगे कहा कि इस स्थिति में सभी पक्षों को बातचीत करने की आवश्यकता है, ताकि किसी भी संभावित सैन्य संघर्ष से बचा जा सके।
आगे क्या होगा?
अब जबकि UNSC में यह प्रस्ताव विफल हो गया है, आगे की स्थिति अनिश्चित है। विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिमी देशों को अब नए रणनीतिक उपायों पर विचार करना होगा। इसके अलावा, ईरान के साथ बातचीत फिर से शुरू करना भी एक विकल्प हो सकता है। आने वाले दिनों में, यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या कोई नया प्रस्ताव सामने आएगा या फिर स्थिति इसी तरह स्थिर बनी रहेगी।



