Business

UPI के 10 साल: छुट्टे के बदले टॉफी लेने की मजबूरी नहीं, फिर भी 75% लोग पेमेंट पर फीस के खिलाफ

UPI का जादू: एक दशक का सफर

यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) ने पिछले एक दशक में भारतीय वित्तीय प्रणाली में क्रांतिकारी बदलाव लाया है। इसकी शुरुआत 2016 में हुई थी और तब से इसने कैशलेस लेन-देन को एक नई दिशा दी है। UPI की मदद से अब लोग आसानी से अपने स्मार्टफोनों के जरिए पैसे भेज और प्राप्त कर सकते हैं, बिना किसी भौतिक नकद के।

छुट्टे पैसे की परेशानी से मुक्ति

पहले, जब भी कोई छोटी खरीदारी होती थी, जैसे टॉफी या चॉकलेट खरीदने के लिए, दुकानदारों के पास हमेशा छुट्टे पैसे नहीं होते थे। लेकिन अब, UPI के माध्यम से, छोटे-मोटे लेन-देन भी आसान हो गए हैं। ग्राहक अपनी पसंदीदा दुकानों पर QR कोड स्कैन करके तुरंत भुगतान कर सकते हैं। इससे न केवल समय की बचत होती है, बल्कि यह ग्राहकों को सुविधा भी प्रदान करता है।

फीस पर बढ़ती असहमति

हालांकि, हाल ही में एक सर्वेक्षण से पता चला है कि 75% भारतीय उपभोक्ता UPI लेन-देन पर लगने वाली फीस के खिलाफ हैं। यह फीस उन लोगों के लिए एक चिंता का विषय बन गई है, जो आमतौर पर छोटे लेन-देन करते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह फीस बढ़ती है, तो यह UPI के उपयोग को प्रभावित कर सकती है और कैशलेस लेन-देन की आदत को कमजोर कर सकती है।

लोगों की राय और विशेषज्ञों की दृष्टि

एक प्रमुख वित्तीय विश्लेषक ने कहा, “UPI ने भारत में डिजिटल भुगतान को व्यापक स्तर पर लोकप्रिय बनाया है। लेकिन अब यदि फीस का मामला उभरता है, तो यह एक बड़ी चुनौती बन सकती है।” वहीं, आम लोगों में भी इस विषय पर चिंता है। एक उपभोक्ता ने कहा, “हम छोटे लेन-देन के लिए फीस नहीं देना चाहते। यह हमारी आदतों को प्रभावित कर सकता है।”

भविष्य की संभावनाएं

UPI का भविष्य उज्ज्वल दिख रहा है, लेकिन यह इस बात पर निर्भर करता है कि क्या सरकार और बैंकों द्वारा इस पर लगने वाली फीस को नियंत्रित किया जाता है। यदि फीस कम रखी जाती है, तो लोग UPI का अधिकतम उपयोग करेंगे। अन्यथा, लोग फिर से कैश लेन-देन की ओर लौट सकते हैं, जो कि डिजिटल इंडिया के लक्ष्य के विपरीत होगा।

WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now
Instagram Group Join Now

Sneha Verma

स्नेहा वर्मा बिजनेस और अर्थव्यवस्था की विशेषज्ञ पत्रकार हैं। IIM अहमदाबाद से MBA करने के बाद उन्होंने वित्तीय पत्रकारिता को अपना करियर बनाया। शेयर बाजार, स्टार्टअप और आर्थिक नीतियों पर उनकी गहरी पकड़ है।

Related Articles

Back to top button