अमेरिका-ईरान की मिसाइलों की जंग अब थाली तक पहुंची… होर्मुज बंद होने से कैसे बढ़ रहा खाने का संकट?

खाने का संकट: एक नई चुनौती
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने अब खाने के संकट को जन्म दे दिया है। जब से होर्मुज जलडमरूमध्य में दोनों देशों के बीच टकराव बढ़ा है, वैश्विक खाद्य आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हो रही है। यह स्थिति चिंताजनक है, क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य का इस्तेमाल विश्व के अधिकांश तेल और गैस की आपूर्ति के लिए किया जाता है।
क्या हो रहा है?
हाल ही में, अमेरिका ने ईरान पर नए प्रतिबंध लगाए हैं, जिससे ईरान ने मिसाइल परीक्षणों को तेज कर दिया है। इस स्थिति ने न केवल दोनों देशों के बीच तनाव को बढ़ाया है, बल्कि इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ा है। खाद्य वस्तुओं की कीमतें आसमान छू रही हैं और कई देशों में खाद्य संकट की आशंका उत्पन्न हो गई है।
कब और कहां?
यह संकट तब शुरू हुआ जब अमेरिका ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की धमकी दी और ईरान ने जवाब में अपने मिसाइल कार्यक्रम को तेज कर दिया। ये घटनाएँ पिछले कुछ महीनों में हुईं, विशेष रूप से सितंबर 2023 के बाद से जब ईरान ने अपने समुद्री सीमाओं की सुरक्षा को मजबूत किया।
क्यों और कैसे?
खाद्य संकट का मुख्य कारण होर्मुज जलडमरूमध्य का बंद होना है। यह जलडमरूमध्य वैश्विक तेल के 20% से अधिक का परिवहन करता है। जब यहां युद्ध जैसे हालात बनते हैं तो खाद्य वस्तुओं का परिवहन प्रभावित होता है। इसके परिणामस्वरूप, खाद्य कीमतें बढ़ जाती हैं और कई देशों में खाने की कमी हो जाती है।
इसका प्रभाव: आम जनता पर असर
इस स्थिति का सबसे अधिक असर आम जनता पर पड़ रहा है। भारत जैसे देशों में जहां पहले से ही खाद्य कीमतें उच्च स्तर पर हैं, वहां अब और वृद्धि की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह स्थिति जारी रही, तो आने वाले महीनों में खाद्य संकट और गहरा सकता है।
विशेषज्ञों की राय
खाद्य नीति विशेषज्ञ डॉ. रमेश शर्मा का कहना है, “अगर होर्मुज जलडमरूमध्य में स्थिति और बिगड़ती है, तो हमें खाद्य सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।” उन्होंने यह भी कहा कि सरकारों को इस संकट से निपटने के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।
आगे क्या हो सकता है?
आने वाले समय में अगर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ता रहा, तो खाद्य संकट और भी गंभीर हो सकता है। इसके लिए देश को खाद्य आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने और वैकल्पिक रास्तों की खोज करनी होगी।



