खामनेई की मौत से तेहरान में अराजकता तक, US-इजरायल और ईरान युद्ध का 10वां दिन; अब तक की घटनाएँ
प्रस्तावना
ईरान में हाल के दिनों में जारी संकट ने पूरे मध्य पूर्व में तनाव को बढ़ा दिया है। ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामनेई की मौत के बाद से तेहरान में जो अराजकता फैली है, उसने यूएस और इजरायल के साथ युद्ध की स्थिति को और गंभीर बना दिया है। यह जंग अब 10वें दिन में प्रवेश कर चुकी है, और इस दौरान कई महत्वपूर्ण घटनाएँ घटित हुई हैं।
क्या हुआ?
खामनेई की मौत के बाद ईरान में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए हैं। सरकार ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सुरक्षा बलों की तैनाती की है। इसी बीच, इजरायल ने ईरान के विभिन्न ठिकानों पर हवाई हमले किए हैं, जिससे स्थिति और भी बिगड़ गई है। अमेरिका ने इजरायल के इस कदम का समर्थन किया है, जिससे ईरान की प्रतिक्रिया और भी तीव्र हो गई है।
कब और कहां?
यह स्थिति 10 दिन पहले तब शुरू हुई जब खामनेई की अचानक मृत्यु की खबर आई। उनके निधन के बाद, तेहरान में हजारों लोगों ने सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान, ईरान के विभिन्न शहरों में भी तनाव की स्थिति देखी जा रही है।
क्यों और कैसे?
खामनेई की मौत ने ईरान में सत्ता के संघर्ष को जन्म दिया है। कई समूह एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं और सत्ता पर काबिज होने के लिए लड़ रहे हैं। इजरायल ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर चिंता जताते हुए हमले किए हैं, जबकि अमेरिका ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए इजरायल को समर्थन दिया है। यह सब कुछ इस बात का संकेत है कि मध्य पूर्व में स्थिति कितनी नाजुक है।
किसने क्या कहा?
विशेषज्ञों का मानना है कि इस संकट का असर सिर्फ ईरान तक ही सीमित नहीं रहेगा। पूर्व अमेरिकी राजनयिक डेविड बुक्सबाम ने कहा, “इस स्थिति का प्रभाव न केवल ईरान, बल्कि समस्त क्षेत्र पर पड़ेगा। यदि यह संघर्ष बढ़ता है, तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा।”
आम लोगों पर प्रभाव
इस युद्ध ने आम लोगों की जिंदगी को प्रभावित किया है। सुरक्षा कारणों से लोग अपने घरों से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। बाजार बंद हैं और जीवन यापन करना मुश्किल हो गया है। इस संकट के कारण ईरान में आर्थिक स्थिति और भी बदतर हो गई है।
आगे क्या हो सकता है?
विशेषज्ञों का मानना है कि यह संघर्ष अभी खत्म होने वाला नहीं है। ईरान अपनी स्थिति को मजबूत करने के लिए और अधिक आक्रामक हो सकता है। दूसरी ओर, अमेरिका और इजरायल भी अपनी रणनीतियों में बदलाव कर सकते हैं। यदि स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई, तो यह युद्ध का रूप ले सकता है, जो कि पूरे मध्य पूर्व के लिए गंभीर परिणाम ला सकता है।



