राहुल गांधी ने मांगा कांशीराम के लिए ‘भारत रत्न’, मायावती ने पलटवार कर याद दिलाया इतिहास

नई दिल्ली: कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शनिवार को बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की संस्थापक कांशीराम को “भारत रत्न” देने की मांग की। उनके इस बयान के बाद बसपा प्रमुख मायावती ने पलटवार करते हुए राहुल के पिता और पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के कार्यकाल के दौरान कांशीराम के प्रति की गई उपेक्षा को याद दिलाया।
क्या हुआ?
राहुल गांधी ने अपने ट्विटर हैंडल पर एक पोस्ट साझा करते हुए कहा, “कांशीराम साहब ने समाज के उन तबकों के लिए आवाज उठाई जो अक्सर हाशिए पर रहते हैं। उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। उन्हें ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया जाना चाहिए।” यह बयान तब आया जब देश में सामाजिक न्याय और समानता की बात हो रही है।
कब और कहां?
यह बयान राहुल गांधी ने 28 अक्टूबर 2023 को दिया, जब वे दिल्ली में एक कार्यक्रम में उपस्थित थे। इस कार्यक्रम में कई सामाजिक कार्यकर्ता और राजनीतिक नेता भी शामिल हुए थे। राहुल का यह बयान उस समय आया है जब कांशीराम की जयंती नजदीक है, जो 15 मार्च को मनाई जाती है।
क्यों यह महत्वपूर्ण है?
कांशीराम का भारतीय राजनीति में एक विशेष स्थान है। उन्होंने दलितों और पिछड़े वर्गों के अधिकारों के लिए संघर्ष किया और बसपा की स्थापना की। उनके योगदान को मान्यता देने के लिए ‘भारत रत्न’ की मांग न केवल कांशीराम के प्रति सम्मान है, बल्कि यह उन लाखों लोगों के प्रति भी है जो सामाजिक न्याय की लड़ाई में शामिल रहे हैं।
मायावती का पलटवार
मायावती ने राहुल के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “यह उचित नहीं है कि राहुल गांधी कांशीराम को ‘भारत रत्न’ देने की मांग कर रहे हैं, जब उनके परिवार ने कांशीराम के योगदान को कभी नहीं माना।” उन्होंने यह भी कहा कि राहुल को अपने परिवार की राजनीतिक इतिहास को समझना चाहिए, जिसमें कांशीराम के प्रति अनदेखी शामिल है।
आम जन पर प्रभाव
इस घटना का व्यापक असर हो सकता है। जहां एक ओर कांशीराम के लिए ‘भारत रत्न’ की मांग से दलित और पिछड़े वर्ग के लोगों में सकारात्मक भावना उत्पन्न होगी, वहीं दूसरी ओर यह राजनीतिक दलों के बीच एक नई बहस को जन्म दे सकता है। यह मुद्दा आगामी चुनावों में भी महत्वपूर्ण हो सकता है।
विशेषज्ञों की राय
राजनीतिक विश्लेषक डॉ. संजय राठी ने कहा, “राहुल गांधी का यह बयान कांशीराम की विरासत को पुनर्जीवित करने का एक प्रयास है। इससे कांग्रेस को अपने पुराने वोट बैंक को पुनः हासिल करने में मदद मिल सकती है।”
आगे का क्या?
आने वाले समय में, यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या राहुल गांधी की मांग पर कोई कार्रवाई होती है या नहीं। इसके अलावा, मायावती और कांग्रेस के बीच इस मुद्दे पर और बहस हो सकती है। आगामी चुनावों में यह एक प्रमुख चुनावी मुद्दा बन सकता है।



