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धरती पर फिर से भट्टी का ताप, अल नीनो और आईओडी का डबल अटैक, सूखा-लू-मारामारी की आशंका!

अल नीनो और आईओडी का प्रभाव

जलवायु परिवर्तन के चलते, भारत में एक बार फिर से अल नीनो और इंडियन ओशियन डिपोल (आईओडी) का संयोजन देखने को मिल रहा है। यह दोनों घटनाएं सामान्यतः जलवायु के तंत्र में महत्वपूर्ण परिवर्तन लाती हैं, जो सूखा, गर्मी और महंगाई का कारण बन सकती हैं।

क्या हो रहा है?

विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले महीनों में अल नीनो का प्रभाव ज्यादा देखने को मिलेगा। इस बार यह प्रभाव इतना तीव्र हो सकता है कि देश के विभिन्न हिस्सों में बाढ़ और सूखे दोनों की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

कब और कहाँ?

अल नीनो के प्रभाव की शुरुआत इस साल के अंत में होगी, और इससे आने वाली गर्मियों में देश के कई हिस्सों में तापमान में वृद्धि होने की संभावना है। विशेष रूप से मध्य और उत्तर भारत के राज्य अधिक प्रभावित हो सकते हैं।

क्यों हो रहा है?

ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन के कारण समुद्र के तापमान में वृद्धि हो रही है, जो अल नीनो की स्थिति को जन्म देती है। इसके साथ ही, आईओडी भी इस स्थिति को और अधिक गंभीर बना सकता है।

इसका आम लोगों पर असर

इस स्थिति का सीधा असर आम जनता पर पड़ेगा। सूखे और लू के कारण फसल उत्पादन में कमी आएगी, जिससे खाद्य पदार्थों की महंगाई बढ़ सकती है। विशेषकर गेंहू, चावल और दालों के दामों में वृद्धि हो सकती है।

विशेषज्ञों की राय

जलवायु वैज्ञानिक डॉ. राधिका शर्मा का कहना है, “अगर अल नीनो का प्रभाव इसी तरह जारी रहा, तो हमें आने वाले समय में कृषि संकट का सामना करना पड़ सकता है। सरकार को चाहिए कि वह तत्काल कदम उठाए।”

आगे क्या हो सकता है?

अगर सरकार और संबंधित संस्थाएं समय पर उचित कदम नहीं उठाती हैं, तो स्थिति और बिगड़ सकती है। किसानों को उनकी फसलें बचाने के लिए अतिरिक्त सहायता की आवश्यकता होगी। इसके अलावा, लोगों को भी महंगाई के प्रति सतर्क रहना होगा।

इस प्रकार, अल नीनो और आईओडी का डबल अटैक भारत के लिए एक गंभीर चेतावनी है। देशवासियों को इसके प्रभावों के प्रति जागरूक रहना चाहिए और सरकार को आवश्यक कदम उठाने चाहिए।

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Priya Sharma

प्रिया शर्मा एक अनुभवी राष्ट्रीय मामलों की संवाददाता हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर करने के बाद वे पिछले 8 वर्षों से राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग कर रही हैं।

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