मेरठ की प्रणिता ट्रोलिंग से टूटीं, रिटायर्ड जज पिता ने सदमे से निकालने के लिए बजाए ढोल

मेरठ की रहने वाली प्रणिता, जो हाल ही में अपने तलाक के बाद ट्रोलिंग का शिकार बनीं, ने इस मुश्किल समय में अपने पिता के समर्थन को महसूस किया। उनके पिता, एक रिटायर्ड जज, ने अपनी बेटी को इस सदमे से बाहर निकालने के लिए अनोखा तरीका अपनाया। उन्होंने ढोल बजाने का निर्णय लिया, जिससे प्रणिता को थोड़ी राहत मिली।
क्या हुआ?
प्रणिता के तलाक के बाद, उन्हें सोशल मीडिया पर काफी ट्रोलिंग का सामना करना पड़ा। इस ट्रोलिंग ने उनके मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर डाला। उनके पिता ने देखा कि उनकी बेटी इस कठिन दौर से गुजर रही है, इसलिए उन्होंने उसे खुश करने के लिए ढोल बजाने का फैसला किया।
कब और कहां?
यह घटना हाल ही में मेरठ शहर में हुई, जब प्रणिता अपने परिवार के साथ समय बिता रही थीं। उनके पिता ने एक स्थानीय समारोह में ढोल बजाना शुरू किया, जिससे पूरे परिवार का माहौल खुशनुमा हो गया।
क्यों और कैसे?
प्रणिता के पिता ने कहा, “मैंने देखा कि मेरी बेटी कितनी उदास थी। तलाक के बाद उसे बहुत सदमा लगा था। मैंने सोचा कि कुछ खास करना चाहिए जिससे उसे खुशी मिले। ढोल बजाना एक पुराना भारतीय परंपरा है, जो उत्सव और खुशी की भावना को जगाता है।” उनके इस कदम ने न केवल प्रणिता को खुश किया, बल्कि परिवार के बाकी सदस्यों को भी एकजुट किया।
जनता पर असर
इस घटना ने यह दिखाया है कि सोशल मीडिया ट्रोलिंग का मानसिक स्वास्थ्य पर कितना बुरा असर डाल सकता है। प्रणिता की कहानी उन कई लोगों के लिए प्रेरणा बन सकती है जो इसी तरह की स्थिति का सामना कर रहे हैं।
विशेषज्ञों की राय
मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. नीतू शर्मा ने कहा, “इस तरह के मामलों में परिवार का समर्थन बहुत महत्वपूर्ण होता है। प्रणिता के पिता का कदम एक उदाहरण है कि कैसे परिवार हर मुश्किल समय में सहारा बन सकता है।”
आगे क्या?
प्रणिता ने सोशल मीडिया पर अपनी कहानी साझा करने का निर्णय लिया है, जिससे दूसरों को इस तरह की समस्याओं का सामना करने में मदद मिल सके। उनके अनुभव से यह भी समझा जा सकता है कि मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल कैसे की जानी चाहिए।
प्रणिता की इस कहानी ने हमें यह सीख दी है कि मुश्किल समय में परिवार का साथ और सकारात्मकता ही हमें आगे बढ़ाने में मदद कर सकती है।



