Home National तेजा दशमी उत्सव – मेला, कहानी, वीर तेजाजी की साहसिक सौर्य गाथा

तेजा दशमी उत्सव – मेला, कहानी, वीर तेजाजी की साहसिक सौर्य गाथा

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तेजा दशमी उत्सव – मेला, कहानी, वीर तेजाजी की साहसिक सौर्य गाथा

Teja Dashmi 2019 : तेजादशमी का पर्व संपूर्ण भारत के अनेक प्रांतों में श्रद्धा, आस्था एवं विश्वास के प्रतीकस्वरूप मनाया जाता है. तेजा दशमी भाद्रपद के महीने के शुक्ल दशमी को मनाई जाती हैं. वीर तेजा या तेजाजी ( Tejaji ) एक राजस्थानी लोक देवता हैं. उन्हें शिव के प्रमुख ग्यारह अवतारों में से एक माना जाता है और उन्हें ग्रामीण राजस्थान में एक देवता के रूप में पूजा जाता है. वीर तेजाजी का जन्म भारत के राजस्थान के खड़नाल में लगभग 1256 में हुआ था. उनके माता-पिता, रामकुंवरी और ताहर, धौला जाट थे. कहा जाता हैं कि तेजाजी की मृत्यु 1304 में युद्ध में गायों के झुंड को बचाने की कोशिश हुई थी. कहानी कहती है कि मरते समय उसने एक सांप को अपनी जीभ काटने की अनुमति दी, जो उसके शरीर का एकमात्र निराधार क्षेत्र था. बदले में, साँप ने वादा किया कि अगर वे तेजा का आशीर्वाद मांगते हैं तो कोई भी व्यक्ति या जानवर सर्पदंश से नहीं मरेंगे।

तेजा दशमी की कथा Teja Dashmi ki Katha, Story : Teja Dashmi 2019

प्रचलित कथा के अनुसार प्राचीन समय में तेजाजी राजा बाक्साजी के पुत्र थे। वे बचपन से ही साहसी थे और जोखिमभरे काम करने से भी नहीं डरते थे. एक बार वे अपने साथी के साथ बहन को लेने उसके ससुराल गए. उस दिन भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि थी. बहन के ससुराल जाने पर तेजा को पता चलता है कि मेणा नामक डाकू अपने साथियों के साथ बहन की ससुराल से सारी गायों को लूटकर ले गया है. तेजाजी अपने साथी के साथ जंगल में मेणा डाकू से गायों को छुड़ाने के लिए जाते हैं. रास्ते में एक बांबी के पास भाषक नाम का सांप घोड़े के सामने आ जाता है और तेजा को डंसने लगता है. इसके बाद तेजाजी उस सांप को वचन देते हैं कि अपनी बहन की गायों को छुड़ाने के बाद मैं वापस यहीं आऊंगा, तब मुझे डंस लेना. ये सुनकर सांप ने रास्ता छोड़ दिया. तेजाजी डाकू से अपनी बहन की गायों को आजाद करवा लेते हैं. डाकूओं से हुए युद्ध की वजह से वे लहुलुहान हो जाते हैं और ऐसी ही अवस्था में सांप के पास जाते हैं. तेजा को घायल अवस्था में देखकर नाग कहता है कि तुम्हारा पूरा शरीर खून से अपवित्र हो गया है. मैं डंक कहां मारुं? तब तेजाजी उसे अपनी जीभ पर काटने के लिए कहते हैं. तेजाजी की वचनबद्धता को देखकर नागदेव उन्हें आशीर्वाद देते हैं कि जो व्यक्ति सर्पदंश से पीड़ित है, वह तुम्हारे नाम का धागा बांधेगा, उस पर जहर का असर नहीं होगा. उसके बाद नाग तेजाजी की जीभ पर डंक मार देता है. इसके बाद से हर साल भाद्रपद शुक्ल दशमी को तेजाजी के मंदिरों में श्रृद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है. जिन लोगों ने सर्पदंश से बचने के लिए तेजाजी के नाम का धागा बांधा होता है, वे मंदिर में पहुंचकर धागा खोलते हैं.

तेजा दशमी का मेला Teja Dashmi Ka Mela : Teja Dashmi 2019

तेजा दशमी 2019 की तारीख 8 सितम्बर, रविवार हैं. तेजादशमी के दिन नागौर व देश के कोने कोने में जहाँ वीर तेजाजी के मंदिर बने हुए है, विशाल मेले भरते हैं.

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