टीकाकरण में नया इतिहास: तीन दशकों में कवरेज 21 से बढ़कर 91.8 प्रतिशत हुआ

टीकाकरण कवरेज का नया मील का पत्थर
भारत ने एक नई उपलब्धि हासिल की है, जहां देश का टीकाकरण कवरेज पिछले तीन दशकों में 21 प्रतिशत से बढ़कर 91.8 प्रतिशत तक पहुंच गया है। यह आंकड़ा न केवल स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, बल्कि यह देश की स्वास्थ्य सुरक्षा को भी सुदृढ़ करता है। यह उपलब्धि केंद्र सरकार और राज्य सरकारों के साथ-साथ स्वास्थ्य विभाग की ज़िम्मेदारियों को दर्शाती है, जिन्होंने इस दिशा में मेहनत की है।
क्या है टीकाकरण कवरेज?
टीकाकरण कवरेज से तात्पर्य है कि कितने प्रतिशत लोगों को आवश्यक टीके लगाए गए हैं। यह आंकड़े देश के स्वास्थ्य परिदृश्य को समझने में मदद करते हैं। पिछले कुछ दशकों में, सरकार ने कई टीकाकरण अभियानों का संचालन किया, जिससे लोगों में टीकाकरण के प्रति जागरूकता बढ़ी है।
कब और कैसे हुआ यह परिवर्तन?
यह परिवर्तन मुख्य रूप से 1990 के दशक से शुरू हुआ, जब भारत ने अपने राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम को लागू किया। सरकार ने विभिन्न टीकों को शामिल किया और विशेष रूप से बच्चों के लिए टीकाकरण को अनिवार्य बनाया। इसके साथ ही, स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं ने गांव-गांव जाकर टीकाकरण की जानकारी दी और लोगों को इसके महत्व के बारे में जागरूक किया।
इसका महत्व और प्रभाव
टीकाकरण कवरेज में यह वृद्धि न केवल स्वास्थ्य के लिए, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण है। जब अधिक लोग टीका लगवाते हैं, तो संक्रामक बीमारियों का प्रसार कम होता है। इससे स्वास्थ्य सेवाओं पर बोझ कम होता है और लोग स्वस्थ रहते हैं। इसके अलावा, यह विश्व स्वास्थ्य संगठन जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ भारत की छवि को भी मजबूत करता है।
विशेषज्ञों की राय
डॉ. सुमित शर्मा, एक प्रसिद्ध बाल रोग विशेषज्ञ, कहते हैं, “यह टीकाकरण कवरेज में वृद्धि केवल सरकारी प्रयासों का परिणाम नहीं है, बल्कि यह समाज की जागरूकता और स्वास्थ्य के प्रति लोगों के दृष्टिकोण में बदलाव का भी संकेत है।” उनके अनुसार, यदि यह प्रवृत्ति जारी रहती है, तो भारत में कई बीमारियों का eradication संभव है।
भविष्य में क्या हो सकता है?
आगे चलकर, सरकार को टीकाकरण कवरेज को और बढ़ाने के लिए नए उपायों पर ध्यान देना होगा। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में, जहां अभी भी टीकाकरण दर कम है। इसके साथ ही, नई बीमारियों के लिए भी अनुसंधान और विकास की आवश्यकता है।
इस प्रकार, भारत ने टीकाकरण में एक नया इतिहास रच दिया है, जो न केवल आज के लिए, बल्कि भविष्य के लिए भी एक मजबूत आधार तैयार करता है।



