कोलोरेक्टल कैंसर: 20 साल से अधिक अनुभवी डॉक्टर ने बताया बड़ी आंत में कैंसर क्यों होता है, इससे जुड़े मिथक, लक्षण, जांच और इलाज

कोलोरेक्टल कैंसर की बढ़ती समस्या
कोलोरेक्टल कैंसर, जो बड़ी आंत और मलाशय में होता है, आज एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या बन चुका है। इसकी बढ़ती दर ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों को चिंतित कर दिया है। भारत में इस प्रकार के कैंसर से प्रभावित लोगों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि जीवनशैली में बदलाव, अनहेल्दी डाइट और तनाव के कारण इस कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं।
क्यों होता है कोलोरेक्टल कैंसर?
कोलोरेक्टल कैंसर का मुख्य कारण आंतों में पॉलीप्स का बनना होता है। ये पॉलीप्स धीरे-धीरे कैंसर में बदल सकते हैं। इसके अलावा, जीन संबंधी कारक, धूम्रपान, अत्यधिक शराब का सेवन और मोटापा भी इसके जोखिम को बढ़ाते हैं। डॉक्टरों का मानना है कि यदि समय पर जांच कराई जाए, तो इस कैंसर को रोकने में मदद मिल सकती है।
लक्षण और मिथक
कोलोरेक्टल कैंसर के लक्षणों में पेट में दर्द, वजन में कमी, मल में खून आना और थकान शामिल हैं। लेकिन कई लोग इन लक्षणों को हल्के में लेते हैं। डॉ. राजेश शर्मा, एक अनुभवी गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट, बताते हैं, “लोगों में यह मिथक है कि अगर कोई लक्षण नहीं है, तो कैंसर नहीं हो सकता। यह गलत है। नियमित जांच जरूरी है।”
जांच और इलाज के तरीके
कोलोरेक्टल कैंसर की जांच के लिए कोलोनोस्कोपी एक प्रभावी विधि है, जिसमें डॉक्टर बड़ी आंत के अंदर झांकते हैं। इसके अलावा, बायोप्सी और इमेजिंग टेस्ट भी किए जा सकते हैं। यदि कैंसर का पता चल जाता है, तो सर्जरी, कीमोथेरपी और रेडियोथेरपी जैसे उपचार किए जाते हैं। डॉ. शर्मा कहते हैं, “समय पर इलाज से मरीज की जीवन दर बढ़ सकती है।”
आगे की संभावनाएं
भारत में कोलोरेक्टल कैंसर की बढ़ती दर से स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव बढ़ रहा है। सरकार और स्वास्थ्य संगठनों को इस दिशा में जागरूकता बढ़ाने और स्क्रीनिंग कार्यक्रमों को लागू करने की आवश्यकता है। अगर हम समय पर कदम उठाते हैं, तो हमें इस गंभीर बीमारी से जूझने में काफी मदद मिल सकती है।



