जानिए आखिर क्यों गणपति जी को सबसे पहले पूजने की आस्था है, और हिंदू धर्म में क्या है इनका महत्व

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हिंदू शब्दशः में, ‘श्री गणेश’ वाक्यांश किसी भी कार्य की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। विशेष रूप से यह कुछ अच्छे और सकारात्मकता की शुरुआत। कई हिंदू अनुष्ठान सबसे पहले भगवान गणेश की पूजा से ही शुरू होते हैं। इसे जानने के लिए हमें भगवान गणेश की कहानी पर एक संक्षिप्त जानकारी प्राप्त करने की आवश्यकता है।

 

प्रभु शिव ने जब मां पार्वती द्वारा निर्मित गणेश जी का वध कर दिया तो इससे मां पार्वती क्रोधित हो गईं और उन्होंने पूरी सृष्टि को नष्ट करने की धमकी दी। भगवान शिव ने तब भगवान गणेश को पुनः जीवित करने के लिए गणपति के सिर को एक हाथी के सिर में बदल दिया और उन्हें सभी देवताओं में सबसे आगे रखा। गणेश के शरीर पर हाथी का सिर गजासुर का था, एक हाथी जो भगवान शिव को उसकी मृत्यु के बाद उसके सिर को सुशोभित करने की कामना करता था, भगवान शिव ने उस गजासूर के सिर से अपने पुत्र को नया जीवन दान दिया।

 

अपने पुत्र गणेश के प्रति शिव और पार्वती के प्रेम और भक्ति को देखकर, भगवान शिव ने गणेश को आशीर्वाद दिया और भक्तों से कहा कि कोई भी शुभ कार्य शुरू करने से पहले हमेशा सभी गणेश की पूजा अवश्य करें।

 

इसलिए हिंदू विचारधारा में हर कथा या पूजा से पहले भगवान गणेश की पूजा अवश्य की जाती है। कई लोग भगवान गणेश के हाथी के सिर को उनकी बुद्धि से जोड़ते हैं। इस प्रकार वह सभी शुभ कार्य गणेश आरती या गणेश मंत्र से ही शुरू करते हैं।

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