श्रीलंका के बाद अब पाकिस्तान का हुआ बुरा हाल, लोगों को चाय पीने के लिए भी किया मना

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pakistan economic crisis
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Pakistan Economic Crisis : क्या पाकिस्तान भी श्रीलंका की तरह बर्बाद होने वाला है? पाकिस्तान का हाल इतना बेहाल है कि पाकिस्‍तान के मिनिस्‍टर ने तो लोगों को चाय पीने के लिए भी मना किया है. अब आप समझ सकते है जिस देश में चाय पिने के लिए मना किया जा रहा है उस देश का क्या हाल होगा। इतना ही नहीं पाकिस्तान में पेपर की क्राइसिस की वजह स्टूडेंट्स को बुक तक नहीं मिलेगी। इतनी बुरी हालत हो चुकी है कि पेट्रोल के प्राइस आसमान छू रहे है। आईएमएफ ने तो सरकारी नौकरी की सैलरी न देने की सलाह तक दे डाली है। पाकिस्तान के पास अब आने वाले सिर्फ दो महीनों तक खर्च चलाने के लिए पैसा बचा है। पाकिस्तान पूरी तरह से कर्ज में डूब चुका है।

अब तक पाकिस्तान आईएमएफ से 22 बार कर्जा ले चुका है, लेकिन इसके अलावा वर्ल्ड बैंक और एशियन बैंक्स से भी भारी भरकम कर्जा ले रखा हैं। आज के वक्त में पाकिस्तान के ऊपर 130 बिलियन का कर्ज हो चुका है और ये कर्ज उतारने के लिए फिर से छह बिलियन डॉलर का कर्ज ले रहा है।

इस वजह से हुआ पाकिस्तान का बुरा हाल – Pakistan Economic Crisis

आपको बता दे कि पाकिस्तान लगभग 600 मिलियन डॉलर की चाय इम्पोर्ट करता है। इसी वजह से पाकिस्तान के मिनिस्टर ने चाय कम पीने के लिए बोला था। लेकिन आखिर पाकिस्तान की इतनी बुरी हालत के पीछे के क्या रीजन है? तो आपको बता दे एक समय था जब पाकिस्तान फास्टेस्ट ग्रोइंग इकॉनमी था। मैन्युफैक्चरिंग सेगमेंट में लगभग 8% का ग्रोथ था और ये सब ग्रोथ कर्ज की वजह से आ रहा था। पाकिस्तान में कभी कोई स्टेबल गोवेर्मेंट नहीं हुई है। आज तक के इतिहास में पाकिस्तान के किसी भी प्राइम मिनिस्टर ने अपने पांच साल का कार्यकाल पूरा नहीं किया है. या तो उनके लोगों ने उनकी सरकार गिरा दिया या फिर उनकी हत्या कर दी। पाकिस्तान में पॉलिटिकल स्टेबिलिटी न होना फॉरेन इन्वेस्टमेंट को दूर रखता है। यही कारण है कि जहां की सरकार की पाँच साल की गारंटी नहीं होती। वहां कोई इन्वेस्टमेंट क्या करेगा लेकिन जिसका कोई नहीं होता, उसका चाइना होता है और यही हुआ पाकिस्तान के साथ भी। चीन ने पाकिस्तान को अपने जाल में ऐसा फंसाया कि अब उसको चीन के आगे गिड़गिड़ाना पड़ता है। चाइना लोन देने के लिए वर्ल्ड बैंक से डबल यानी 6 % तक चार्ज लेता है। जो काम होता है वह भी चीन की कंपनी ही करती है। पाकिस्तान में जिन प्रोजेक्ट्स पर चाइना काम कर रहा है, वहां पर 50% लोग चाइना के वर्कर्स है. अगर ये प्रोजेक्ट फेल भी हुआ तब भी चाइना को कोई लॉस नहीं होता क्योंकि वह पहले ही इस प्रोजेक्ट से प्रॉफिट कमा चुका है। दुनिया में लगभग 40 ऐसे देश हैं जिन्होंने अपनी जीडीपी के 10% से ज्यादा का लोन चाइना से लिया हुआ है। यानी कुल मिलाकर चाइना टोटली वेलफेयर पोजीशन में रहता है.

अगर लोन नहीं चुकाया तो पाकिस्तान का क्या होगा

लेकिन अब सवाल ये उठता है कि अगर चाइना से लिया गया उधार पाकिस्तान नहीं देता तो क्या होगा ये तो कोई नहीं बता सकता कि चाइना पाकिस्तान के साथ क्या करेगा लेकिन पाकिस्तान इससे बचने के लिए कर्ज के एवज में जम्मू-कश्मीर प्रांत के हिस्से गिलगित-बाल्टिस्तान को चीन के हवाले कर सकता है, जिस पर उसने अवैध कब्जा जमा रखा है। गिलगित-बाल्टिस्तान भारतीय प्रांत का अंग है और उसी के एक हिस्से अक्साई चिन को पहले ही पाकिस्तान, चीन के हवाले कर चुका है। और अगर ऐसा हुआ तो ये इंडिया के लिए बहुत बुरी खबर होगी.

लोन लिए गए पैसे का इस्तेमाल तभी बेनिफिशियल होता है जब उसे देश के डिवेलपमेंट में यूज किया जाए। लेकिन पाकिस्तान ने कभी एजुकेशन, इन्फ्रास्ट्रक्चर, स्किल डिवेलपमेंट जैसी चीजों पर इन्वेस्ट किया ही नहीं। उसने मिलिटरी और कर्ज चुकाने में सबसे ज्यादा खर्च किया है और यह सब बताता है कि उसका बजट, मिलिट्री पर पाकिस्तान हर साल अपने बजट को बढ़ाता है और यही कारण है कि डिवेलपमेंट नहीं होने के कारण इनकम सोर्स पाकिस्तान में बड़े ही नहीं। यहां पर आज भी 58% लोगों को पढ़ना लिखना आता है। बाकी सब अनपढ़ हैं। अब जब देश पढ़ेगा नहीं तो आगे कैसे बढ़ेगा और क्यों कोई दूसरा देश ऐसे में इन्वेस्ट करेगा। पाकिस्तान के हालात इतने खराब हैं कि वहां के लोगों को खाने की चीजों के लिए भी मोटी रकम चुकानी पड़ रही है। लगभग 4.67 मिलियन लोग यानि की 25% आबादी को भूख का भयंकर सामना करना पड़ रहा है.

लेकिन इस से इंडिया को क्या सीखना चाहिए। इस तरह की किसी भी सिचुएशन से बचने के लिए इंडिया को हर हाल में बेहतरीन एजुकेशन पर कंटीन्यूअसली फोकस करना होगा। पाकिस्तान के कंपैरिजन में इंडिया एजुकेशन पर 1% ज्यादा खर्च करता है। यानी पाकिस्तान में 2.5% और इंडिया 3.5% खर्च करता है, लेकिन यह बहुत कम है। हमें उन देशों से कंपैरिजन करना है जो डिवेलप हैं, और साथ ही साथ इस बात पर भी फोकस करना होगा कि दूसरे देशों में इंडिया से एक्सपोर्ट ज्यादा हो। एंप्लॉयमेंट नंबर लगातार बढ़े, फॉरेन इन्वेस्टमेंट ज्यादा से ज्यादा हो। पॉलिटिकल पार्टीज को खुद का फायदा देखने से ज्यादा देश की डिवेलपमेंट पर फोकस करना होगा। एक दूसरे से लड़ने की बजाय देश को बैंक करप्ट की लड़ाई से बचाना होगा।

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